दिल्ली की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (आईवीपी) के 16 पार्षद अब भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने जा रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मौजूदगी में यह विलय होगा। इसके बाद ये सभी पार्षद आधिकारिक रूप से बीजेपी का हिस्सा बन जाएंगे। माना जा रहा है कि इसके तुरंत बाद एमसीडी की वार्ड समितियों के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन पदों के उम्मीदवारों का भी ऐलान किया जाएगा।
14 महीने पहले बनी थी नई पार्टी
आम आदमी पार्टी से अलग होकर इन पार्षदों ने करीब 14 महीने पहले इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी का गठन किया था। विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की हार के बाद इस नए दल ने एमसीडी की राजनीति में अलग पहचान बनाई। कई मौकों पर इस पार्टी ने बीजेपी का समर्थन किया, हालांकि कुछ मुद्दों पर मतभेद भी सामने आए। अब नगर निगम चुनाव से पहले दोनों दलों के एक साथ आने से दिल्ली की सियासत में नया समीकरण बनता दिखाई दे रहा है।
पदों पर मिल सकती है जिम्मेदारी
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, बीजेपी आईवीपी से आए कुछ पार्षदों को एमसीडी की विभिन्न समितियों और जोन में अहम जिम्मेदारियां दे सकती है। वार्ड समितियों, स्थायी समिति और अन्य पदों पर उन्हें मौका मिलने की चर्चा है। साथ ही आईवीपी के प्रमुख नेताओं को भी संगठन और निगम में महत्वपूर्ण भूमिका मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व की घोषणा के बाद ही साफ होगा।
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2027 चुनाव की तैयारी तेज
अगले नगर निगम चुनाव को देखते हुए बीजेपी अभी से अपनी रणनीति मजबूत कर रही है। दूसरी ओर आईवीपी के पार्षद भी अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करना चाहते हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी में शामिल होने से आगामी चुनाव में टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी। यही वजह है कि यह विलय दोनों पक्षों के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एमसीडी में बीजेपी की ताकत बढ़ेगी
आईवीपी के 16 पार्षदों के शामिल होने के बाद एमसीडी में बीजेपी की संख्या 139 तक पहुंच सकती है। इससे नगर निगम में पार्टी की स्थिति पहले से अधिक मजबूत होगी। विभिन्न जोन में भी बीजेपी का प्रभाव बढ़ने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम आगामी नगर निगम चुनाव से पहले बीजेपी की बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसका असर आने वाले समय में दिल्ली की राजनीति पर देखने को मिल सकता है।