दिल्ली ब्लास्ट मामले के सामने आने के बाद जवाद अहमद सिद्दीकी और उसके भाई हमूद से जुड़ी पुरानी ठगी का बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पता चला कि दोनों भाइयों ने 1990 के दशक में भोपाल गैस त्रासदी से उबर रहे हजारों परिवारों को निवेश का लालच देकर करीब 50 करोड़ रुपये ठग लिए थे। धार्मिक भावनाओं का सहारा लेकर बनाई गई योजनाओं में लोगों की जमा-पूंजी डूब गई थी।
पुराने मामलों की फिर खुली फाइलें
घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने दोनों भाइयों के खिलाफ पुराने ठगी मामलों की जांच दोबारा शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में पता चला कि जावेद और हमूद ने खास तौर पर पुराने शहर के लोगों को निशाना बनाया था। बताया जाता है कि उन्होंने निवेश को “जायज और हलाल आय” बताकर लोगों का भरोसा जीता।
गैस त्रासदी के मुआवजे पर डाला था डाका
1990 के दशक में जब कई परिवार गैस त्रासदी के बाद मिली मुआवजा राशि से जिंदगी पटरी पर ला रहे थे, तब ही भाइयों ने इस रकम पर नजरें गड़ा लीं। “अल-फलाह” और “अल-फहद” नाम से इस्लामिक तरीके से चलने का दावा कर निवेश योजनाएं शुरू की गई थीं।
धार्मिक स्थलों के पास खोले थे दफ्तर
लोगों का भरोसा जीतने के लिए उनके दफ्तर धार्मिक स्थलों के पास खोले गए थे। हमूद का संचालन ताजुल मसाजिद परिसर से होता था, जबकि जावेद का दफ्तर बुधवारा क्षेत्र में था। धार्मिक छवि दिखाकर वे खुद को निष्कपट साबित करते थे और अधिक से अधिक लोगों को जोड़ते थे।
एजेंटों की फौज और झूठे मुनाफे का खेल
उन्होंने एजेंटों के जरिए हजारों लोगों को योजनाओं में शामिल कराया। शुरुआत में एक साल तक नियमित मुनाफा दिखाया जाता था ताकि लोग और निवेश करें। पोल्ट्री फार्म, कृषि प्रोजेक्ट और एग पाउडर एक्सपोर्ट जैसे झूठे प्रलोभन दिखाकर नेटवर्क बढ़ाया गया।
निवेशकों का दर्द आज भी ताज़ा
कई निवेशकों ने बताया कि पैसे निकालने की कोशिश करने पर उन्हें दोबारा निवेश का दबाव बनाया जाता था। अनेक परिवारों ने अपनी जमा-पूंजी खो दी। कई लोग अब भी एफडी की पुरानी रसीदें संभालकर रखे हुए हैं और न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।