दिल्ली ब्लास्ट की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कहानी और भी खतरनाक होती जा रही है। फरीदाबाद में मिले भारी मात्रा के विस्फोटक और डॉक्टर शाहीन की गिरफ्तारी के बाद अब इस केस ने कानपुर का रुख कर लिया है। जांच एजेंसियों को कानपुर के कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में पढ़ रहे डॉ. आरिफ तक पहुंच मिल गई है, जिसे एटीएस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि शाहीन और आरिफ के बीच लंबे समय से संपर्क था और दोनों के बीच कई बार संवेदनशील बातचीत भी हुई है। इतना ही नहीं, ब्लास्ट वाले दिन भी आरिफ, शाहीन और उसके भाई डॉ. परवेज के संपर्क में था। इससे एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को लेकर और ज्यादा सतर्क हो गई हैं।
शाहीन और आरिफ की नज़दीकियां पर नजर
दिलचस्प बात यह है कि डॉ. शाहीन साल 2006 से 2013 तक इसी कैंपस यानी कानपुर मेडिकल कॉलेज और कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में काम कर चुकी है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि शाहीन और आरिफ की नज़दीकियां इसी दौरान बढ़ीं और दोनों कई साल से एक ही नेटवर्क का हिस्सा बने रहे। पुलिस को शाहीन के मोबाइल फोन से जो डाटा मिला है, उसमें SMS के जरिए दोनों की कई बातचीत दर्ज है, जो जांच को और गंभीर दिशा में ले जा रही है। अब अधिकारियों का मानना है कि आरिफ की गिरफ्तारी के बाद शाहीन से जुड़े और कई नाम उजागर हो सकते हैं।
नीट एसएस 2024 बैच का छात्र
आरिफ की पृष्ठभूमि भी हैरान करने वाली है। वह जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग का रहने वाला है और कानपुर के अशोक नगर इलाके में किराये पर रहता था। वह नीट एसएस 2024 बैच का छात्र है। मंगलवार को उसने कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में अपनी शिफ्ट पूरी की और जैसे ही घर पहुंचा, एटीएस की टीम ने उसे वहीं से उठा लिया। संस्थान में इस समय जम्मू-कश्मीर के कुल सात छात्र पढ़ रहे हैं, जिसके बाद पूरे कैंपस में सुरक्षा और जांच दोनों बढ़ा दी गई है। एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि कहीं शाहीन के नेटवर्क में और भी छात्र या डॉक्टर तो शामिल नहीं हैं। फिलहाल आरिफ से लगातार पूछताछ की जा रही है, और जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि उससे मिलने वाली जानकारी दिल्ली ब्लास्ट की साजिश को पूरी तरह उजागर करने में महत्वपूर्ण साबित होगी। दिल्ली से फरीदाबाद और अब कानपुर यह केस जितना खुल रहा है, उतना ही देशभर में फैले एक बड़े मॉड्यूल की ओर इशारा कर रहा है।