दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुआ धमाका कोई अचानक हुआ हमला नहीं था, बल्कि एक बड़ी और लंबे समय से चल रही साजिश का हिस्सा था। जांच में सामने आया कि इस पूरी प्लानिंग के पीछे “मैडम सर्जन” के नाम से पहचानी जा रही डॉ. शाहीन का हाथ है, जो पिछले दो साल से अल फलाह यूनिवर्सिटी के कैंपस में एक गुप्त नेटवर्क खड़ा कर रही थी। शुरुआती सुराग तो दिल्ली में मिले थे, लेकिन असली झटका तब लगा जब फरीदाबाद से बरामद कार और विस्फोटक सामग्री की फोरेंसिक जांच में पता चला कि इस नेटवर्क की पहुंच एक नहीं बल्कि चार शहरों तक थी और एक ही दिन कई धमाकों की तैयारी की गई थी।
चार शहर, आठ लोग, तैयार थी बड़ी प्लानिंग
जांच एजेंसियों को मिले इनपुट के अनुसार डॉ. शाहीन ने आठ लोगों को चार टीमों में बांटा था, और हर टीम को अलग-अलग शहरों में आईईडी ले जाकर धमाका करने की जिम्मेदारी दी गई थी। दिल्ली का ब्लास्ट उसी बड़े प्लान की पहली कड़ी थी। डॉ. शाहीन की गिरफ्तारी के बाद पकड़े गए डॉक्टर डॉ. परवेज, डॉ. सज्जाद, डॉ. अदील और कानपुर से पकड़े गए डॉ. आरिफ सभी सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शाहीन के संपर्क में थे। सभी का लिंक अल फलाह यूनिवर्सिटी से निकल रहा है, जिससे एजेंसियां अब इस पूरे कैंपस नेटवर्क को गहराई से खंगाल रही हैं।
तीन कारें, कई लोकेशन और बदलती मूवमेंट
जांच में यह भी सामने आया कि हमले में एक नहीं बल्कि तीन कारों का इस्तेमाल हुआ था। पहली I20 कार में धमाका हुआ, दूसरी लाल इको-स्पोर्ट फरीदाबाद से बरामद की गई और तीसरी ब्रेज़ा कार अब एजेंसियों के रडार पर है। सूत्र बता रहे हैं कि ब्रेज़ा का इस्तेमाल भी डॉ. उमर और डॉ. मुजम्मिल ने किया था। ब्लास्ट वाली रात शाहीन की लोकेशन दिल्ली, फरीदाबाद और कानपुर के बीच लगातार बदल रही थी। इससे साफ है कि वह पूरे नेटवर्क को दूर बैठकर निर्देश दे रही थी। NCR में चल रही छापेमारी में हर घंटे नए सुराग मिल रहे हैं।
कश्मीर कनेक्शन और आगे बढ़ती जांच
सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब जम्मू-कश्मीर से 13 लोगों को पकड़ा गया, जो मेडिकल, टेक्निकल और स्टूडेंट बैकग्राउंड से आते हैं। इनमें तारिक, आमिर, जमीर, इरफान, यासिर जैसे नाम शामिल हैं। यूपी के सहारनपुर से डॉ. अदील और लखनऊ से डॉ. परवेज की गिरफ्तारी ने यह साफ कर दिया कि शाहीन ने सिर्फ एक यूनिवर्सिटी नहीं बल्कि कई राज्यों में फैला नेटवर्क बनाया था। अभी भी कई शहरों में छापेमारी जारी है और एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मॉड्यूल से जुड़े और भी नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल इतना तय है—दिल्ली का धमाका एक शुरुआत थी और समय रहते मिले सुरागों ने एक बहुत बड़ी साजिश को रोका है।