दिल्ली लाल किला ब्लास्ट की जांच अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। जांच एजेंसियों को पता चला है कि नूंह में मौजूद फर्टिलाइजर की दुकानों से बड़ी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट खरीदा गया था, जिसका इस्तेमाल IED तैयार करने में किया गया। स्पेशल सेल की टीम ने नूंह में कई दुकानों पर छापेमारी की और CCTV व वीडियो रिकॉर्डिंग जम्मू-कश्मीर पुलिस को भेजी, ताकि मुख्य आरोपी डॉ. मुजम्मिल उस दुकान की पहचान कर सके जहां से 20 क्विंटल से ज्यादा NPK फर्टिलाइजर खरीदा गया था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि डॉ. मुजम्मिल, डॉ. अदील, उमर और शाहीन ने मिलकर करीब 20 लाख रुपये इकट्ठा किए और यह रकम उमर को दी गई थी, जिसके जरिए नूंह, गुरुग्राम और आसपास के इलाकों से फर्टिलाइजर और कैमिकल खरीदे गए।
बिल्डिंग नंबर 17 बना ‘ऑपरेशन का बेस’
पूरी साजिश का सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब अल-फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 के कमरा नंबर 13 और 4 की तलाशी में एजेंसियों को दो डायरी मिलीं। यह वही कमरा था जहां डॉ. मुजम्मिल और डॉ. उमर साथ रहते थे और घंटों तक योजनाएं बनाते थे। डायरी में 8 से 12 नवंबर के बीच “ऑपरेशन” शब्द कई बार लिखे मिले, जिससे साफ है कि धमाकों की प्लानिंग लंबे समय से चल रही थी। जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद के विदेशी हैंडलरों से जुड़े थे और सिग्नल ऐप पर एक गुप्त ग्रुप बनाकर निरंतर संपर्क में थे।
छापेमारी में मिली कोडवर्ड वाली नोटबुक
यूनिवर्सिटी से मिली नोटबुक और कमरे में मिले दस्तावेजों में “शिपमेंट”, “पैकेज”, “मटेरियल” जैसे कोडवर्ड मिले, जिनका मतलब IED, कैमिकल और फर्टिलाइजर बताया जा रहा है। एजेंसियों ने बताया कि अमोनियम नाइट्रेट अपने आप में विस्फोटक नहीं होता, लेकिन जब इसे दूसरे पदार्थों के साथ मिलाया जाता है तो इसका प्रभाव बेहद खतरनाक हो जाता है। यही वजह है कि पुलिस को लाल किला धमाके वाली कार से दो अलग-अलग केमिकल की गंध और अवशेष मिले।
नूंह और फरीदाबाद में साजिश की जड़ें
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क दिल्ली, फरीदाबाद और नूंह से चलता था। धौज गांव में पहले ही 360 किलो विस्फोटक बरामद हुआ था, और अब नूंह में हुई खरीद-फरोख्त ने जांच को और गहरा कर दिया है। ATS और स्पेशल सेल की टीमें अब लगातार यूनिवर्सिटी, दुकानों और आसपास के इलाकों की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि डायरी से मिले सुराग आगे इस मॉड्यूल के और सदस्यों का खुलासा कर सकते हैं। जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को जड़ से पकड़ने में जुटी हैं।