दिल्ली केस की जांच में वो मोड़ आया है जिसने पूरे सिस्टम की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों को उमर मोहम्मद की कार से ऐसा सुराग मिला जिसने सारी दिशा बदल दी। जांच टीम को कार के अंदर एक जूता मिला जिसमें TATP नामक बेहद अस्थिर और खतरनाक पदार्थ के निशान पाए गए वही TATP जिसे दुनिया ‘मदर ऑफ शैतान’ यानी शैतान की मां कहकर पहचानती है। माना जा रहा है कि उमर एक शू-बेस्ड ब्लास्ट करने की तैयारी में था और लाल किला के पास हुआ धमाका इसी जूते से जुड़ा हो सकता है। ये खुलासा साफ दिखाता है कि ये कोई छोटी घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित प्लानिंग वाला ऑपरेशन था।
आखिर TATP है क्या और क्यों डराती है दुनिया को?
TATP का पूरा नाम ट्रायएसीटोन ट्राइपेरोक्साइड है और इसकी पहचान दुनिया के सबसे खतरनाक घरेलू विस्फोटक के रूप में है। इसे ‘शैतान की मां’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि हल्की friction, गर्मी या static बिजली तक इसे सक्रिय कर सकती है। पेरिस अटैक, लंदन ब्लास्ट और मध्य-पूर्व की कई बड़ी घटनाओं में यही इस्तेमाल हुआ था। इसकी सबसे खतरनाक बात यह है कि यह कम मात्रा में भी बड़ा नुकसान पहुंचा देता है और ब्लास्ट के बाद ज्यादा सबूत नहीं छोड़ता। यही वजह है कि एजेंसियां इसे मिलने मात्र से हाई-अलर्ट पर चली जाती हैं। दिल्ली केस में इसका मिलना इस बात का संकेत है कि योजना काफी गहरी थी।
सिर्फ 10 ग्राम TATP भी कितना असरदार?
जांच में दावा है कि उमर की कार से मिला विस्फोटक बेहद छोटी मात्रा का था संभवतः 10 ग्राम के आसपास लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इतनी मात्रा भी बेहद घातक हो सकती है। इसकी विस्फोट गति करीब 5300 मीटर प्रति सेकंड है, जो TNT के 60% तक असरदार है। सिर्फ 22 सेंटीमीटर के दायरे में गंभीर नुकसान, 45 सेंटीमीटर में कान को भारी नुकसान और 1 मीटर तक चीजें टूटना इसका सामान्य प्रभाव है। यानी यह दिखने में छोटा ब्लास्ट है, लेकिन भीड़ में इसका असर कई गुना बढ़ सकता था। अगर उमर ज्यादा मात्रा लेकर चलता या लक्ष्य किसी भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में होता, तो नतीजे बेहद घातक हो सकते थे।
जांच अब कई राज्यों में फैल चुकी है !
कार से TATP मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच का दायरा एकदम बढ़ा दिया है। कार की ड्राइविंग सीट के नीचे, टायर के पास और पीछे की सीट से भी विस्फोटक के निशान मिले हैं। यह साफ बताता है कि ये एक बड़ा ऑपरेशन था जिसमें अमोनियम नाइट्रेट और TATP दोनों का इस्तेमाल हुआ। एजेंसियां पता लगा रही हैं कि TATP कहां तैयार हुआ, किसने सप्लाई किया और लक्ष्य कितना बड़ा था। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह काम किसी अकेले व्यक्ति का नहीं लगता, बल्कि किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। यही कारण है कि अब जांच दिल्ली, यूपी और कई अन्य राज्यों में फैल चुकी है।