Delhi blasts: दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट को लेकर जांच एजेंसियों को बड़ा इनपुट मिला है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में सामने आया है कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलरों की सीधी भूमिका थी। आतंकी घटना के वक्त लगातार उनसे संपर्क में थे। जांच में यह भी पता चला है कि आतंकियों ने सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए बेहद शातिर तकनीक अपनाई थी। वे घोस्ट सिम कार्ड और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए पाकिस्तान और PoK में मौजूद अपने आकाओं से निर्देश ले रहे थे।
ड्यूल फोन रणनीति से बचते रहे आतंकी
NIA की जांच में खुलासा हुआ है कि आतंकी मुजम्मिल, आदिल और उनके अन्य साथी ‘ड्यूल फोन’ रणनीति का इस्तेमाल कर रहे थे। हर आतंकी के पास दो से तीन मोबाइल फोन होते थे, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया जाता था। एक फोन ‘क्लीन फोन’ होता था, जो उनके असली नाम पर रजिस्टर्ड रहता था और रोजमर्रा के निजी व पेशेवर कामों में इस्तेमाल किया जाता था। दूसरा फोन पूरी तरह आतंकी गतिविधियों के लिए रखा जाता था, जिससे वे केवल अपने पाकिस्तानी हैंडलरों से संपर्क करते थे।
घोस्ट सिम से पाकिस्तान तक सीधा कनेक्शन
जांच एजेंसियों के मुताबिक आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे दूसरे मोबाइल फोन की सिम उनके नाम पर रजिस्टर्ड नहीं थीं। इन सिम कार्डों को फर्जी आधार कार्ड के जरिए हासिल किया गया था, जिन्हें अब ‘घोस्ट सिम’ कहा जा रहा है। अब तक की जांच में दर्जनों ऐसे सिम कार्ड सामने आए हैं। इन सिम्स के जरिए आतंकी व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों से संपर्क बनाए हुए थे।
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उमर नबी भी था आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा
लाल किले के पास विस्फोटक से भरी गाड़ी चलाते समय मारे गए डॉक्टर उमर नबी को भी इस आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा बताया गया है। जांच में सामने आया है कि घटना से ठीक पहले वह भी पाकिस्तानी हैंडलरों के संपर्क में था। एजेंसियों का मानना है कि हमले से पहले अंतिम निर्देश उमर नबी को ही दिए गए थे। कार ब्लास्ट की पूरी योजना और टाइमिंग पाकिस्तान से मिले निर्देशों के आधार पर तय की गई थी।
यूट्यूब से IED बनाने की ट्रेनिंग
जांच एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलरों ने आतंकियों को इंटरनेट और यूट्यूब के जरिए IED बनाने की ट्रेनिंग दी थी। विस्फोटक तैयार करने से लेकर उसे कार में फिट करने तक की पूरी जानकारी ऑनलाइन माध्यम से दी गई।पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों के निर्देश पर ही लाल किले जैसे संवेदनशील इलाके को निशाना बनाया गया। फिलहाल इस पूरे नेटवर्क की जांच NIA कर रही है और पाकिस्तान कनेक्शन को लेकर सबूत जुटाए जा रहे हैं।