Delhi Building Collapse---दिल्ली में जर्जर और निर्माणाधीन इमारतों के ढहने का सिलसिला एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सत्य निकेतन में पीजी की इमारत गिरने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन लंबे समय तक चलता रहा और कई लोगों की मौत की खबर सामने आई। पिछले करीब डेढ़ साल के दौरान राजधानी में ऐसे कई हादसे हुए हैं। हर घटना के बाद कार्रवाई और जांच की बातें होती हैं, लेकिन सवाल यही है कि हादसे आखिर रुक क्यों नहीं रहे?
सत्य निकेतन में फिर टूटा सुरक्षा का भरोसा
6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पीजी की इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। मलबे में छात्रों और अन्य लोगों के दबे होने की आशंका के चलते लंबे समय तक राहत और बचाव अभियान चलता रहा। हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि इमारत करीब 30 साल पुरानी थी और उसकी हालत खराब थी। आसपास की कई इमारतों को लेकर भी सुरक्षा संबंधी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि इलाके में कई निर्माण बिना अनुमति के विस्तार के साथ खड़े किए गए।
रोहिणी में निर्माणाधीन इमारत बनी मौत की वजह
जुलाई 2026 में रोहिणी इलाके में चार मंजिला निर्माणाधीन इमारत ढह गई थी। हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे। मलबे में मजदूरों के दबे होने की आशंका के बाद रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। इस घटना में तीन मजदूरों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति घायल हुआ था। निर्माणाधीन इमारत का इस तरह ढह जाना निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सैदुलाजाब से पहाड़गंज तक सामने आईं कई घटनाएं
30 मई को सैदुलाजाब इलाके में पांच मंजिला इमारत ढहने से 6 लोगों की जान चली गई थी। हादसे में इमारत का मलबा पास की कैंटीन पर जा गिरा था, जहां लोग मौजूद थे। इससे पहले 17 मई 2025 को पहाड़गंज में निर्माणाधीन इमारत का बेसमेंट ढहने से तीन मजदूरों की मौत हुई थी। तेज आंधी और बारिश के बाद हुए इस हादसे ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े किए थे।
मुस्तफाबाद और वेलकम हादसों की दर्दनाक याद
18 अप्रैल 2025 को मुस्तफाबाद में चार मंजिला इमारत ढहने से 11 लोगों की मौत हुई थी। उस समय भी अवैध निर्माण और इलाके में नियमों की अनदेखी को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद जुलाई 2025 में नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के वेलकम इलाके में चार मंजिला जर्जर रिहायशी इमारत गिर गई थी। इस हादसे में भी कई लोगों की जान गई। लगातार सामने आती घटनाएं बताती हैं कि पुरानी और कमजोर इमारतों की पहचान तथा समय रहते कार्रवाई कितनी जरूरी है।
हादसों के बाद कार्रवाई नहीं, पहले रोकथाम जरूरी
अप्रैल 2025 से सितंबर 2026 के बीच सामने आई इन घटनाओं में कुल 35 मौतों का आंकड़ा बताया जा रहा है। आंकड़े भले अलग-अलग घटनाओं के हों, लेकिन हर हादसा एक ही सवाल छोड़ता है—खतरनाक इमारतों और अवैध निर्माण पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती? किसी इमारत के गिरने के बाद जांच और मुआवजे की घोषणा से उन जिंदगियों को वापस नहीं लाया जा सकता, जो सिस्टम की चूक की कीमत चुकाती हैं। दिल्ली में अब जरूरत हादसे के बाद कार्रवाई की नहीं, बल्कि हादसा होने से पहले खतरा पहचानने और उसे रोकने की है।