Lawrence Bishnoi: दिल्ली की एक अदालत ने रंगदारी मांगने और फायरिंग से जुड़े मामले में गैंगस्टर Lawrence Bishnoi को बड़ी राहत दी है। Saket Court ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए बिश्नोई और दो अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। यह मामला एक वकील से करीब एक करोड़ रुपये की कथित रंगदारी मांगने से जुड़ा था। अदालत ने कहा कि सिर्फ धमकी या पैसे की मांग के आधार पर जबरन वसूली का अपराध साबित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट का फैसला
मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सका। अदालत ने कहा कि केस में मुख्य रूप से आरोपियों के कथित बयानों के अलावा ऐसा कोई मजबूत साक्ष्य नहीं था जो अपराध को साबित कर सके।
सिर्फ धमकी काफी नहीं
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जबरन वसूली का अपराध तब माना जाता है जब धमकी देकर वास्तव में पैसे या संपत्ति हासिल की जाए। अगर सिर्फ फोन कॉल या धमकी दी गई हो और कोई भुगतान या संपत्ति का हस्तांतरण न हुआ हो, तो कानून के तहत इसे रंगदारी का अपराध साबित करना मुश्किल होता है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला वर्ष 2023 में दर्ज एक शिकायत से जुड़ा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक अज्ञात नंबर से एक करोड़ रुपये की मांग करते हुए कई कॉल आए थे। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
आरोपियों को राहत
अदालत ने इस मामले में तीनों आरोपियों को संबंधित धाराओं से बरी कर दिया। हालांकि यह फैसला केवल इस विशेष केस से जुड़ा है। अधिकारियों के अनुसार अन्य मामलों में जांच या कानूनी प्रक्रिया अलग से जारी रह सकती है।