Delhi Police: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराज्यीय ऑटो-थेफ्ट गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके कब्जे से तीन चोरी के ट्रक, दो कारें और एक ट्रक के सभी हिस्से बरामद किए गए हैं। गिरोह दिल्ली-एनसीआर में वाहनों की चोरी और उनके पुर्जों की अवैध बिक्री में सक्रिय था। क्राइम ब्रांच की सेंट्रल रेंज की टीम ने खास तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की। टीम ने कई स्थानों पर छापेमारी कर आरोपियों को पकड़ा।
कबाड़ के नाम पर चोरी के ट्रक की खरीद-बिक्री
क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि कुछ वाहन चोर गिरोह चोरी किए गए ट्रकों को तोड़कर उनके पुर्जे मयापुरी के स्क्रैप बाजार में बेचते हैं। सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर सुनील कुमार कलखंडे के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। पूरी कार्रवाई एसीपी राजबीर मलिक के पर्यवेक्षण और डीसीपी विक्रम सिंह के निर्देशन में की गई। 10 अक्टूबर की सुबह टीम ने कंझावला इलाके में इंडेन गैस गोदाम के पास जाल बिछाया। वहां से पुलिस ने जसप्रीत सिंह उर्फ मन्नी और परमिंदर सिंह उर्फ लालू को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से ईचर ट्रक (रजिस्ट्रेशन नंबर DL1GE30XX) बरामद हुआ जो पूरी तरह से तोड़ा जा चुका था। जांच में पता चला कि यह ट्रक थाना नरेला से चोरी हुआ था (ई-एफआईआर संख्या 27941/25)। बाद में 27 अक्टूबर को टीम ने मोटी नगर में छापेमारी कर तीसरे आरोपी गुरप्रीत सिंह (48 वर्ष) को भी गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि वही चोरी किए गए वाहनों को खरीदकर तोड़ने और उनके पुर्जे बेचने का मुख्य सूत्रधार है।
पुलिस ने जब्त किए चोरी के वाहन और दस्तावेज
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और रिमांड के दौरान बड़ी मात्रा में चोरी के वाहन और उनके पुर्जे बरामद किए। एक पूरी तरह से तोड़ा गया ईचर ट्रक, जिसका इंजन, बॉडी और केबिन बरामद किया गया। एक और ट्रक, जिसका इस्तेमाल चोरी के ट्रक के पुर्जों को ले जाने में किया गया था। दो पुराने मामलों में चोरी हुए ट्रकों के मूल दस्तावेज और नंबर प्लेटें, जिनकी चोरी आदर्श नगर और पंजाबी बाग थाना क्षेत्रों से हुई थी। ईको कार और सीएनजी वाहनों के पुर्जे, जो गोविंदपुरी और ओखला थाना क्षेत्रों से चोरी किए गए थे।
इस तरह चलाता था गिरोह अपना खेल
गिरोह का नेटवर्क दिल्ली, नोएडा, नूह, बहादुरगढ़ और पंजाब तक फैला हुआ था। वाहन चोरी करने के बाद ये लोग उन्हें दिल्ली के कंझावला, बजघेड़ा, बिजवासन और मयापुरी जैसे इलाकों में लाते थे, जहां गुरप्रीत सिंह और उसके साथी उन्हें तोड़कर पुर्जों के रूप में बेच देते थे। हर चोरी की गाड़ी को कबाड़ के रूप में दिखाकर उसके इंजन और बॉडी को अलग-अलग स्क्रैप मार्केट में बेच दिया जाता था।
आरोपियों की प्रोफाइल
जसप्रीत सिंह उर्फ मन्नी (30 वर्ष) ने 10वीं तक पढ़ाई की, मयापुरी के स्क्रैप मार्केट में काम करते हुए इस गिरोह में शामिल हुआ। वहीं, परमिंदर सिंह उर्फ लालू (29 वर्ष) ने 9वीं के बाद पढ़ाई छोड़कर स्क्रैप मार्केट में आया, वहीं चोरी के वाहन तोड़ने के धंधे में उतर गया। गुरप्रीत सिंह (48 वर्ष) ने 8वीं तक पढ़ाई की, पिता की मौत के बाद कबाड़ का काम शुरू किया। धीरे-धीरे वाहन चोरी और पुर्जे बेचने का नेटवर्क खड़ा किया। इसके खिलाफ हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में पहले भी केस दर्ज हैं।