Delhi Crime : दिल्ली-NCR में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ सामने आए हालिया यौन अपराधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है. 5 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान बेंच ने दिल्ली पुलिस से साफ तौर पर पूछा कि अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय उन्हें पहले रोकने के लिए जमीन पर क्या व्यवस्था मौजूद है.
संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस से यह जानना चाहा कि क्या दिल्ली के ऐसे इलाकों की लगातार निगरानी करने की कोई व्यवस्था है, जहां महिलाओं के खिलाफ अपराध का खतरा ज्यादा रहता है. कोर्ट ने CCTV कैमरों की निगरानी, पुलिस पेट्रोलिंग और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया। साथ ही यह भी पूछा गया कि सिर्फ कैमरे लगाने से क्या फायदा, अगर उनकी लगातार मॉनिटरिंग नहीं होती.
अपराधियों के मन में कानून का डर हो
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पुलिस को जरूरत पड़ने पर सख्ती बरतने से पीछे नहीं हटना चाहिए. अदालत का जोर इस बात पर था कि कानून का प्रभाव ऐसा होना चाहिए कि अपराध करने की सोच रखने वाले लोगों के मन में कार्रवाई का डर पैदा हो और वे अपराध करने से पहले परिणाम के बारे में सोचें.
पार्क, मेट्रो और कॉलेज पर खास नजर
कोर्ट ने संवेदनशील सार्वजनिक जगहों पर निगरानी बढ़ाने की बात कही. इनमें पार्क, बस स्टॉप, मेट्रो स्टेशन, रेलवे स्टेशन और स्कूल-कॉलेज जैसे स्थान शामिल हैं. अदालत ने पहले भी कहा था कि खराब रोशनी, कमजोर निगरानी और कम पुलिस पेट्रोलिंग की वजह से सार्वजनिक स्थानों को महिलाओं और बच्चों के लिए जोखिम वाला क्षेत्र नहीं बनने दिया जा सकता.
ये भी पढ़ें - OTT Release This Week: 5 से 11 अक्टूबर तक ओटीटी पर मचेगा धमाल, Reporting Live से Animals तक आएंगी ये फिल्में-सीरीज
CCTV से लेकर पेट्रोलिंग तक मांगी जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से CCTV कैमरों की स्थिति, उनकी मॉनिटरिंग, बीट पेट्रोलिंग और संवेदनशील इलाकों में पुलिस की मौजूदगी जैसे मुद्दों पर जानकारी मांगी है. कोर्ट ने यह भी पूछा कि यौन अपराधों से जुड़े डेटाबेस का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है और क्या उससे अपराध रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं.
हर महिला खुद को सुरक्षित महसूस करे
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में हर महिला को रात के समय भी सड़क पर चलने, मेट्रो से सफर करने या किसी सार्वजनिक स्थान पर जाने में सुरक्षा का एहसास होना चाहिए. अदालत का फोकस केवल अपराध के बाद आरोपियों को पकड़ने पर नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर है जिससे अपराध को पहले ही रोका जा सके.