दिल्ली के मालवीय नगर में एक होटल में लगी भीषण आग ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस हादसे में 21 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि दर्जनों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस दर्दनाक घटना के बाद राजधानी में अग्नि सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों के मन में यह चिंता बढ़ रही है कि आखिर दिल्ली में आग की घटनाएं इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही हैं और क्या सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त हैं।
4 महीने में 7800 से ज्यादा मामले
दिल्ली अग्निशमन सेवा के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में आग और उससे जुड़ी 7800 से अधिक आपातकालीन घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसका मतलब है कि राजधानी में हर महीने औसतन 1950 और हर दिन करीब 65 घटनाएं सामने आ रही हैं। आंकड़ों को देखें तो लगभग हर घंटे 3 जगह आग लगने या आपात स्थिति की सूचना मिल रही है। सिर्फ अप्रैल महीने में ही 2300 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए, जो कुल घटनाओं का लगभग 30 प्रतिशत हैं।
पिछले साल से भी ज्यादा खतरा
साल 2025 के जनवरी से अप्रैल के बीच 6511 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जबकि इस साल इसी अवधि में यह संख्या 7800 के पार पहुंच गई। यानी एक साल में करीब 1290 मामलों की बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली अग्निशमन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ आग लगने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। कुछ दिनों पहले विभाग को एक ही दिन में 256 कॉल तक मिली थीं।
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एक के बाद एक सामने आए बड़े हादसे
हाल के महीनों में दिल्ली में कई बड़े अग्निकांड सामने आए हैं। जून में शिक्षा मंत्रालय के कार्यालय में आग लगी, मई में मुखर्जी नगर की इमारत में आग लगी और विवेक विहार हादसे में 9 लोगों की जान चली गई। मार्च में पालम इलाके में आग लगने से 9 लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले द्वारका की एक बहुमंजिला सोसाइटी में आग लगने के दौरान एक परिवार के तीन सदस्यों की जान चली गई थी। इन घटनाओं ने लगातार सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े किए हैं।
17 साल में बढ़े कॉल और मौतों के आंकड़े
दिल्ली अग्निशमन सेवा के पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि आग की घटनाओं और उनसे होने वाले नुकसान में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 2009-10 में जहां 21 हजार से अधिक कॉल दर्ज हुई थीं, वहीं हाल के वर्षों में यह संख्या 30 हजार से ऊपर पहुंच गई। वर्ष 2023-24 में 31 हजार से ज्यादा कॉल के साथ 1303 लोगों की मौत दर्ज की गई, जो बेहद चिंताजनक आंकड़ा माना जा रहा है।
क्या अब सख्त कार्रवाई की जरूरत है?
मालवीय नगर हादसे के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी में फायर सेफ्टी नियमों की सख्ती से समीक्षा की जरूरत है। होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल, कोचिंग सेंटर और बहुमंजिला इमारतों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है। दिल्ली में लगातार बढ़ती आग की घटनाएं सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह चेतावनी हैं कि अगर समय रहते व्यवस्था मजबूत नहीं हुई तो ऐसे हादसे भविष्य में और बड़ी त्रासदियों का कारण बन सकते हैं।