दिल्ली में नई सरकार के गठन को एक साल पूरा हो चुका है और इस दौरान किए गए वादों व कामकाज की चर्चा तेज है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में बनी सरकार ने अपने पहले वर्ष में कई कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की, जबकि कुछ बड़े और चुनौतीपूर्ण वादे अब भी अधूरे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि एक साल में सरकार ने क्या हासिल किया और किन मोर्चों पर अभी मेहनत बाकी है।
सत्ता परिवर्तन और सरकार की प्राथमिकताएं
विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली में लंबे समय बाद सत्ता परिवर्तन हुआ और जनता ने भारतीय जनता पार्टी को मौका दिया। चुनाव से पहले जारी संकल्प पत्र में महिलाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और बुनियादी ढांचे को केंद्र में रखा गया था। सरकार ने पहले साल को “तैयारी का वर्ष” बताते हुए योजनाओं की नींव मजबूत करने पर जोर दिया।
पूरे हुए वादे और शुरू हुई योजनाएं
सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, सस्ती भोजन व्यवस्था और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाए। गरीब और जरूरतमंद वर्ग को राहत देने वाली योजनाएं जमीन पर दिखने लगीं। सड़कों के सुधार, इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने और जल परियोजनाओं की शुरुआत को सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों के रूप में गिना रही है।
महिला, छात्र और श्रमिक कल्याण पर फोकस
महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए नई योजनाएं लाई गईं, जिनमें आर्थिक सहायता और खाद्य सुरक्षा से जुड़े फैसले शामिल हैं। निर्माण श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए सहायता राशि तय की गई, ताकि पढ़ाई आर्थिक कारणों से न रुके। छात्र कल्याण से जुड़ी नीतियों पर भी काम शुरू हुआ, हालांकि उनका पूरा लाभ अभी मिलना बाकी है।
अधूरे वादे और बड़ी चुनौतियां
कुछ अहम वादों पर अब भी अमल बाकी है। नदी की सफाई, कूड़े के पहाड़ हटाने और वायु प्रदूषण कम करने जैसे मुद्दे सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। मुफ्त या सस्ती सुविधाओं से जुड़ी कुछ योजनाएं बजट में शामिल तो हैं, लेकिन उनका पूर्ण क्रियान्वयन आने वाले समय में होना है।
एक साल का रिपोर्ट कार्ड और आगे की राह
सरकार का दावा है कि पहले साल में 40 से 50 फीसदी वादों पर या तो काम पूरा हो चुका है या मजबूत शुरुआत हो गई है। बड़े बुनियादी और पर्यावरणीय प्रोजेक्ट्स के लिए 2026 को निर्णायक साल माना जा रहा है। नतीजों के आधार पर ही जनता तय करेगी कि बदलाव उम्मीदों पर कितना खरा उतरा।