
अगर आप दिल्ली, गाजियाबाद या फरीदाबाद जैसे बड़े शहरों में रहते हैं और सोचते हैं कि आपकी ऊंची-ऊंची इमारतें पूरी तरह सुरक्षित हैं, तो अब सतर्क हो जाइए. हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने सबकी नींद उड़ा दी है. विज्ञान पत्रिका ‘नेचर’ में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, दिल्ली की जमीन हर साल करीब 51 मिलीमीटर तक नीचे धंस रही है यानी धीरे-धीरे पूरी राजधानी जमीन के अंदर खिसक रही है और इसका सीधा असर हजारों इमारतों पर पड़ रहा है. रिपोर्ट ने दावा किया है कि फिलहाल 2,264 इमारतें हाई-रिस्क जोन में हैं, जिनकी नींव अब पहले जैसी मजबूत नहीं रही.
दिल्ली में सबसे ज्यादा खतरे में हैं ये इलाके
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के कई इलाके ऐसे हैं जहां जमीन तेजी से धंस रही है. बिजवासन में हर साल 28.5 मिमी, फरीदाबाद में 38.2 मिमी और गाजियाबाद में करीब 20.7 मिमी की दर से भूमि नीचे जा रही है यानी ये शहर धीरे-धीरे अपने ही भार से झुकते जा रहे हैं. वहीं, दिल्ली के द्वारका इलाके में वैज्ञानिकों ने एक अजीब पैटर्न देखा है यहां कुछ हिस्सों में जमीन हर साल करीब 15.1 मिमी ऊपर उठ रही है, जिससे भविष्य में असंतुलन और संरचनात्मक नुकसान की संभावना बढ़ गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थिति ऐसे ही रही तो आने वाले 30 सालों में दिल्ली की 3,000 से ज्यादा इमारतें गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं.
भूजल निकासी बनी सबसे बड़ी वजह
रिपोर्ट ने साफ किया है कि दिल्ली के धंसने की सबसे बड़ी वजह भूजल का अत्यधिक दोहन है. शहर की प्यास बुझाने के लिए लगातार धरती के अंदर से पानी खींचा जा रहा है, जिससे जमीन के भीतर खाली जगहें बन रही हैं और मिट्टी अपनी पकड़ खो रही है. इसके अलावा, क्लाइमेट चेंज और अनियमित मानसून ने भी इस खतरे को और बढ़ा दिया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अब बारिश देर से शुरू होती है और जल्दी खत्म हो जाती है, जिससे पानी की प्राकृतिक भरपाई नहीं हो पाती और जमीन का संतुलन बिगड़ रहा है.
डूबते शहरों की लिस्ट में शामिल हो रही राजधानी
रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले दशकों में दिल्ली भी डूबते शहरों की लिस्ट में शामिल हो सकती है. इससे सड़कों में दरारें, इमारतों की नींव कमजोर होने और बड़ी संरचनाओं के झुकने जैसे खतरे पैदा होंगे. वैज्ञानिकों का सुझाव है कि अब वक्त आ गया है कि सरकार भूजल दोहन पर रोक लगाए, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा दे और बिल्डिंग पॉलिसी को सख्त बनाए. ये रिपोर्ट सिर्फ एक वैज्ञानिक चेतावनी नहीं, बल्कि भविष्य की घंटी है क्योंकि जो ऊपर से चमकती राजधानी नजर आती है, उसके नीचे धरती अब खिसकने लगी है.