दिल्ली हाई कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की मौजूदा प्रक्रिया को सही ठहराया है। कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी के एक मतदाता को 'फॉर्म 6' भरने का निर्देश दिया है, जिसका इस्तेमाल नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए होता है। दरअसल, घर बदलने की वजह से एसआईआर (विशेष पुनरीक्षण) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से उस व्यक्ति का नाम हटा दिया गया था। उसने कोर्ट से अपील की थी कि पता बदलने के लिए उसे 'फॉर्म 8' भरने की अनुमति दी जाए, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
दलील को कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया
जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस अदिति चौधरी की बेंच ने निलोत्पल दत्त और अन्य लोगों की याचिका को मानने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि ईसीआई उन मौजूदा मतदाताओं के लिए प्रक्रिया में बदलाव करे, जिनका नाम एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जब मतदाता सूची के लिए फॉर्म भरे जा रहे थे, तब वे अपना फॉर्म नहीं भर पाए क्योंकि वे अपना पुराना घर छोड़ चुके थे। इस वजह से मतदाता सूची से उनके नाम हटा दिए गए। दत्त और अन्य याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि ईसीआई उनके मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड को 'फॉर्म 8' के जरिए नए पते पर ट्रांसफर कर दे, न कि उन्हें 'फॉर्म 6' भरकर फिर से नया रजिस्ट्रेशन कराना पड़े। उनकी दलील को कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।
नए मतदाता के रूप में पंजीकरण
जस्टिस मेहता और जस्टिस चौधरी ने चुनाव आयोग के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया कि अगर दत्ता मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए 'फॉर्म 6' का इस्तेमाल करते हैं, तो उन पर गलत घोषणा करने का आरोप नहीं लगाया जाएगा। चुनाव आयोग का 'फॉर्म 6' नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए होता है, जबकि 'फॉर्म 8' का इस्तेमाल पता बदलने या मौजूदा मतदाता सूची में दर्ज जानकारी को ठीक कराने के लिए किया जाता है। चुनाव आयोग के वकील संजय वशिष्ठ ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता सच में समस्या का समाधान चाहते हैं, तो वे 'रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' के नियम 25(2) और नियम 13(1)(ए) के तहत आने वाला 'फॉर्म 6' भरकर जमा कर सकते हैं। इससे उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा।
गलत घोषणा करने का आरोप लग सकता है
उन्होंने बताया कि सुनवाई की पिछली तारीख पर भी, उन्होंने दत्ता से फॉर्म भरने का अनुरोध किया था और यह भरोसा भी दिलाया था कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी) इसमें मदद करेंगे, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने ऐसा न करने का फैसला किया, जिसका कारण वे ही बेहतर जानते हैं। अदालत ने कहा, “दोनों पक्षों के वकीलों को सुनने के बाद, हमारी राय है कि जब ईसीआई के वकील की ओर से यह सुझाव दिया जा रहा है और वह भी इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर के निर्देशों के अनुसार, तो याचिकाकर्ता नंबर 1 की यह आशंका कि उन पर गलत घोषणा करने का आरोप लग सकता है, बेबुनियाद है।”