DUSU Election: दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव के प्रचार के दौरान हुई हिंसा और नियमों के उल्लंघन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याल और न्यायधीश तेजस कारिया की बेंच ने सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस और दिल्ली यूनिवर्सिटी को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि लोकतंत्र में आपराधिक समाज में नहीं बदला जा सकता। गुरुवार को कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि अगर पुलिस कार्रवाई से वह संतुष्ट नहीं हुआ तो वोटों की गिनती और रिजल्ट के ऐलान पर रोक लगाई जा सकती है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि इतना पुलिस बल होने के बावजूद विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस और उसके आसपास के इलाके में बिना नंबर वाली और उम्मीदवारों के नाम वाली गाड़ियों का काफिला कैसे निकलने दिया गया। कोर्ट ने कहा कि 10 से 20 गाड़ियों का काफिला था, जिसमें उम्मीदवार कार की छत और कार के बोनट पर चढ़े हुए थे। कोर्ट ने कहा कि ऐसे काफिले से डर, आंतक और दबदबे की भावना पैदा होती है। इस रोकने के लिए पुलिस ने सख्त कदम क्यों नहीं उठाए? और इन्हें ऐसे काफिले निकालने की अनुमति कैसे दे दी?
पुलिस ने अब तक क्या की कार्रवाई
डीसीपी नॉर्थ ने जवाब दिया कि पुलिस लगातार गाड़ियों की चेकिंग कर रही है। वहीं एएसजी चेतन शर्मा ने बी कहा कि अब तक 998 चालान किए गए हैं और वीडियो में दिखने वाले लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, आगे आरसी भी जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आगे बताया कि अबतर 6 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और 4 की गिरफ्तारी भी हुई है।
कोर्ट ने उठाया शिक्षक पर हमले का मुद्दा
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शिक्षक पर हुए हमले के मुद्दो को भी उठाया। कोर्ट ने पूछा कि क्या आरोपी को गिरफ्तार किया गया है? और क्या गिरफ्तार व्यक्ति छात्र है। एएसजी ने बताया कि गिरफ्तारी हुई है। कोर्ट ने आगे पूछा कि क्या इस कार्रवाई के बारे में कॉलेज प्रशासन को जानकारी है? और संबंधित छात्रों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है। इसपर डीयू प्रशासन ने कहा कि छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
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छात्र संगठनों पर हर्जाना लगाने का कोर्ट का विचार
याचिकाकर्ता के वकील को निर्देश दिया गया है कि चुनाव के दौरान नियमों के उल्लंघन साबित करने वाले सभी दस्तावेज एक जगह इकट्ठा करें और हफ्तेभर के अंदर कोर्ट में दाखिल करें। इन दस्तावेजों की प्रतियां सभी पक्षकारों, चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों और छात्र संगठनों को भी दिए जाएं। इन दस्तावेजों के मिलने के बाद छात्र संगठनों को ये जवाब देना होगा कि उनपर हर्जाने की कार्रवाई क्यों न की जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि वह सिर्फ छात्रों पर ही नहीं बल्कि छात्र संगठनों पर भी हर्जाने की कार्रवाई का विचार कर रहा है।