दिल्ली के एक होटल में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत के बाद जांच एजेंसियां अब हादसे की हर परत खंगालने में जुटी हैं। मामले में गिरफ्तार होटल मालिक को अदालत में पेश किया गया, जहां उसने खुद को भी इस हादसे का पीड़ित बताया। हालांकि अदालत ने उसकी दलीलों को पर्याप्त नहीं माना और पुलिस को आगे की जांच के लिए चार दिन की हिरासत दे दी। अब जांच का फोकस होटल प्रबंधन, सुरक्षा इंतजामों और कर्मचारियों की भूमिका पर है।
कोर्ट में होटल मालिक ने रखी अपनी दलील
हादसे के बाद गिरफ्तार होटल मालिक को अदालत में पेश किया गया, जहां बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। वकील ने तर्क दिया कि उनका मुवक्किल भी इस दुर्घटना का शिकार है क्योंकि आग में उसकी पूरी इमारत भी नष्ट हो गई। साथ ही गिरफ्तारी को लेकर कानूनी प्रक्रियाओं के पालन पर भी सवाल खड़े किए गए।
अदालत ने गिरफ्तारी को माना वैध
सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। इसके बाद अदालत ने माना कि गिरफ्तारी नियमों के अनुरूप की गई है और इसमें कोई कानूनी खामी प्रथम दृष्टया नजर नहीं आती। इसी आधार पर होटल मालिक को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया।
कर्मचारियों से पूछताछ को बताया जरूरी
जांच एजेंसियों ने अदालत को बताया कि होटल के कई कर्मचारियों से अभी विस्तृत पूछताछ की जानी बाकी है। अधिकारियों का मानना है कि हादसे से पहले और दौरान की परिस्थितियों को समझने के लिए स्टाफ की भूमिका और जानकारी बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। इसी वजह से पुलिस ने हिरासत की मांग की थी।
सबूत प्रभावित होने की आशंका
अभियोजन पक्ष ने अदालत में यह भी कहा कि यदि आरोपी बाहर रहता है तो वह होटल कर्मचारियों या अन्य संभावित गवाहों को प्रभावित कर सकता है। जांच एजेंसियों का मानना है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है, ताकि सभी तथ्यों को सामने लाया जा सके।
फोरेंसिक जांच से खुलेंगे हादसे के राज
मामले की जांच में फोरेंसिक टीम भी अहम भूमिका निभाने वाली है। अधिकारियों के अनुसार, आग लगने के बाद घटनास्थल पर अत्यधिक तापमान होने के कारण शुरुआती जांच में दिक्कतें आईं। अब फोरेंसिक विशेषज्ञ दोबारा मौके का निरीक्षण करेंगे। उम्मीद है कि तकनीकी जांच से आग लगने के कारणों और सुरक्षा चूक से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।