राजधानी दिल्ली में जल्द हाइड्रोजन से चलने वाली बसें शुरू करने की योजना पर काम हो सकता है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि नगर निगम के कचरे से तैयार हाइड्रोजन का इस्तेमाल सार्वजनिक परिवहन में किया जा सकता है। उनका कहना है कि इससे प्रदूषण कम होगा और कचरे के निपटान की समस्या का भी समाधान मिलेगा।
2027 तक खत्म होंगे कचरे के ढेर
गडकरी ने बताया कि दिल्ली के वेस्ट डिस्पोजल साइट से निकले करीब 80 लाख टन कचरे का इस्तेमाल पहले ही एक्सप्रेसवे निर्माण में किया जा चुका है। अब सरकार बायो-डाइजेस्टर तकनीक के जरिए इसी कचरे से हाइड्रोजन बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि साल 2027 तक देशभर के बड़े कचरा ढेर खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।
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देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन भी तैयार
इसी बीच भारतीय रेल 17 जुलाई से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का व्यावसायिक संचालन शुरू करने जा रही है। यह ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलेगी। हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलने वाली यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल मानी जा रही है। इसमें करीब 2,500 यात्रियों के सफर की व्यवस्था होगी और किराया 5 रुपये से 25 रुपये तक रखा गया है।
ग्रीन ट्रांसपोर्ट की ओर बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि कचरे से हाइड्रोजन बनाकर बसों और ट्रेनों को चलाने की पहल सफल रही तो यह देश के ग्रीन ट्रांसपोर्ट मिशन को नई गति दे सकती है। इससे प्रदूषण कम होगा, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी और नगर निगम के कचरे का उपयोग भी बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।