दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर जांच के बीच नए तथ्य सामने आने लगे हैं। होटल फ्लॉरिस स्टे में लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया, जिससे कई लोग अंदर फंस गए। हादसे में 21 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि राहत-बचाव अभियान के दौरान 37 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। अब घटना से जुड़े कई अहम खुलासे जांच एजेंसियों के सामने आ रहे हैं।
बेसमेंट में फंसे लोगों को निकालना बना बड़ी चुनौती
हादसे के दौरान दमकलकर्मियों को सबसे बड़ी चुनौती इमारत के बेसमेंट तक पहुंचने में आई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बेसमेंट का प्रवेश मार्ग बंद था, जिसके कारण अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लगा। रेस्क्यू टीमों ने जोखिम उठाते हुए अंदर प्रवेश किया और कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। घने धुएं के कारण बचाव कार्य बेहद कठिन परिस्थितियों में किया गया।
10 दमकल गाड़ियों ने संभाला मोर्चा
आग लगने की सूचना सुबह करीब 9 बजे मिलने के बाद दमकल विभाग ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। मौके पर दस दमकल गाड़ियां भेजी गईं, जिनमें वॉटर टेंडर, वॉटर बाउजर और त्वरित प्रतिक्रिया वाहन शामिल थे। लगातार प्रयासों के बाद आग पर नियंत्रण पाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, समय रहते कार्रवाई होने से कई लोगों की जान बचाई जा सकी।
जान बचाने के लिए इमारत से कूदे लोग
हादसे के बाद सामने आए वीडियो घटना की भयावहता को बयां कर रहे हैं। आग और धुएं से घिरे लोगों ने जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों की रेलिंग और खिड़कियों से बाहर निकलने की कोशिश की। कई लोग घबराहट में नीचे कूदते दिखाई दिए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग तेजी से फैली, जिससे लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया।
विदेशी नागरिक भी थे होटल में ठहरे
जानकारी के मुताबिक, होटल में देश के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों के अलावा कुछ विदेशी नागरिक भी ठहरे हुए थे। इमारत में आवासीय सुविधा उपलब्ध होने के कारण बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। राहत दल ने कई विदेशी नागरिकों को भी सुरक्षित बाहर निकाला। सभी प्रभावित लोगों की पहचान और स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है।
हादसे की वजह तलाशने में जुटी जांच एजेंसियां
फिलहाल आग लगने के कारणों का आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। पुलिस, दमकल विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां घटनास्थल की जांच कर रही हैं। विशेषज्ञ टीम तकनीकी पहलुओं की पड़ताल में जुटी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आग कैसे लगी और इतनी तेजी से क्यों फैली। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।