
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के फेज-5 का काम तेज़ी से चल रहा है. अब तक इस खंड का 65 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. कुल 14.6 किलोमीटर लंबे इस खंड को मेरठ में गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा गया है, जिससे दिल्ली-एनसीआर से प्रयागराज तक सफर और भी आसान हो जाएगा.
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मुताबिक, इस खंड का निर्माण कार्य 31 दिसंबर 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा. इससे पहले एक्सप्रेसवे के चार फेज पहले ही बनकर तैयार हो चुके हैं और वाहन चालकों को बड़ी राहत मिल चुकी है.
क्या है फेज-5 की खासियत?
यह खंड गाजियाबाद और मेरठ जिले के 10 गांवों से होकर गुजरता है. इसमें गाजियाबाद के 3 गांव – चूड़ियाला, तल्हैटा और जैनुद्दीनपुर शामिल हैं. बाकी 7 गांव मेरठ जिले में आते हैं – जैसे शाकरपुर, नरहैड़ा, ढकौली, सलेमपुर, चंदसारा, खानपुर और नगलापातू. इसमें गाजियाबाद वाले हिस्से की लंबाई करीब 5.470 किमी है.
कब शुरू हुआ था निर्माण कार्य?
इस खंड का निर्माण 3 अप्रैल 2022 को शुरू हुआ था. उस समय कहा गया था कि काम मार्च 2024 तक पूरा हो जाएगा, लेकिन कुछ तकनीकी और स्थानीय समस्याओं के कारण देरी हुई. अब नया लक्ष्य दिसंबर 2025 तय किया गया है.
क्यों रुका था निर्माण काम?
कुछ समय के लिए काम रोकना पड़ा था क्योंकि किसान मुआवजे को लेकर विरोध कर रहे थे. किसानों की मांग थी कि उन्हें उचित मुआवजा मिले, जो पहले पूरा नहीं किया जा रहा था. NHAI ने इस बारे में उच्च अधिकारियों और शासन को जानकारी दी थी. अब विवाद खत्म हो चुका है और काम दोबारा शुरू हो गया है.
क्या फायदा होगा इस खंड से?
फेज-5 के बनने से दिल्ली, मेरठ और एनसीआर के लोग गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए प्रयागराज तक आसानी से पहुंच सकेंगे. सफर पहले से तेज और सुगम हो जाएगा. इस एक्सप्रेसवे से यातायात का दबाव कम होगा और समय की बचत भी होगी.
यह परियोजना न केवल मेरठ और गाजियाबाद, बल्कि पूरे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी देने में मददगार होगी. अगर काम तय समय पर पूरा हुआ, तो साल के अंत तक लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.