
दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल (RRTS) कॉरीडोर अब अपने अंतिम चरण में है। फिलहाल अशोक नगर, दिल्ली से मेरठ साउथ स्टेशन तक ट्रेनें चल रही हैं। जल्द ही बाकी बचे 27 किलोमीटर ट्रैक पर भी परिचालन शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही 82 किलोमीटर लंबा पूरा कॉरीडोर यात्रियों के लिए खोल दिया जाएगा। इस बड़े कदम के बाद दिल्ली से मेरठ तक सफर का समय लगभग 55 मिनट का रह जाएगा, जिससे रोज़ाना आने-जाने वालों को बड़ी राहत मिलेगी।
एनसीआर के लिए आठ और कॉरीडोर का प्लान
दिल्ली-मेरठ कॉरीडोर के बाद सरकार की योजना एनसीआर में 8 और RRTS कॉरीडोर बनाने की है। इन कॉरीडोर का उद्देश्य है ट्रैफिक जाम को कम करना, पर्यावरण प्रदूषण को घटाना और शहरों के बीच तेज़ व आरामदायक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना।
पहले चरण के तीन प्रमुख कॉरीडोर
सरकार ने पहले चरण में तीन बड़े कॉरीडोर प्रस्तावित किए हैं:
दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ (नमो भारत RRTS): काम पूरा, जल्द पूरी तरह चालू।
दिल्ली-गुरुग्राम-रेवाड़ी-अलवर: काम शुरू होने की तैयारी।
दिल्ली-पानीपत-करनाल: कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार।
इनमें से दिल्ली-मेरठ रूट तो लगभग तैयार है और अगले महीनों में बाकियों पर भी काम शुरू हो जाएगा।
पांच और कॉरीडोर आएंगे आगे
तीन कॉरीडोर के अलावा पांच और रूट पर रैपिड रेल चलाई जाएगी:
दिल्ली-फरीदाबाद-पलवल
दिल्ली-बहादुरगढ़-रोहतक
दिल्ली-शाहदरा-बारौत
गाजियाबाद-खुर्जा
गाजियाबाद-हापुड़
इन सबके बन जाने पर पूरा नेटवर्क लगभग 1500 किलोमीटर लंबा होगा, जो एनसीआर में सफर को आसान बना देगा।
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ट्रैफिक और प्रदूषण से मिलेगी राहत
आरआरटीएस का सबसे बड़ा फायदा होगा कि सड़क पर वाहनों की भीड़ घटेगी और समय की बचत होगी। साथ ही पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों की संख्या कम होगी, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी। यह आधुनिक और सुरक्षित यात्रा का साधन लोगों को एक नए स्तर का आराम देगा।
भविष्य का NCR और भी कनेक्टेड
सरकार का विज़न है कि आने वाले वर्षों में दिल्ली से जुड़े सभी बड़े शहर रैपिड रेल के ज़रिए जोड़े जाएं। इसका सीधा असर व्यापार, रोजगार और शिक्षा पर पड़ेगा। दिल्ली–मेरठ रूट का पूरा खुलना इस दिशा में पहला बड़ा कदम है, जिससे पूरे NCR की तस्वीर बदलने वाली है।