Delhi Metro: डीएमआरसी ने फेज-4 परियोजना के तहत वसंत कुंज मे गोल्डन लाइन को लिए चल रहा अंडरग्राउंड सुरंग का काम पूरा हो गया है। इस सुरंग का निर्माण तुगलकाबाद-एयरोसिटी कॉरिडोर पर किशनगढ़ और वसंत कुंज स्टेशन के बीच 1550 मीटर लंबी टनल को पूरा कर लिया है। इसे बनाने में विशालकाय 91 मीटर लंबी TBM मशीन का इस्तेमाल किया गया। यह नई टनल लगभग 22.86 मीटर की औसत गहराई पर बनी है। इसकी न्यूनतम गहराई 15.48 मीटर और अधिकतम गहराई 30.25 मीटर है। टनल में लगभग 1105 रिंग लगाए गए हैं। इनका अंदरूनी व्यास 5.8 मीटर है।
टनल बनाने की प्रक्रिया
यह टनल अर्थ प्रेशर बैलेंसिंग मेथड तकनीक से बनी है। इसमें प्रीकास्ट टनल रिंग्स से बनी कंक्रीट की परत है। ये टनल रिंग्स मुंडका में बने एक कारखाने में ढाली गई थीं। कंक्रीट के टुकड़ों को जल्दी मजबूत करने के लिए भाप से गर्म किया गया था। सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया। टनल बनाते समय आसपास की इमारतों पर लगे उपकरणों से जमीन की हलचल पर नजर रखी गई। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि कहीं भी कोई नुकसान न हो।
टनल बनाने की मशीन
फेज 4 में 40.109 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड लाइनें बन रही हैं। एयरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर में 19.343 किलोमीटर के अंडरग्राउंड सेक्शन हैं। टीबीएम एक मशीनों के प्रयोग अलग-अलग तरह की मिट्टी और चट्टानों में गोलाकार टनल बनाने के लिए होता है। टीबीएम मशीनें सख्त चट्टान से लेकर रेत तक, किसी भी चीज में छेद कर सकती हैं। इन मशीनों ने टनल बनाने के काम को पूरी दुनिया में बदल दिया है। अब इमारतों और दूसरी चीजों को नुकसान पहुंचाए बिना टनल बनाई जा सकती हैं। टनल बनाने के लिए टीबीएम मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। DMRC फेज 1 से ही टीबीएम मशीनों का इस्तेमाल कर रहा है। फेज 3 में लगभग 50 किलोमीटर के अंडरग्राउंड सेक्शन बने थे। तब दिल्ली में लगभग 30 टीबीएम मशीनें लगाई गई थीं। डीएमआरसी का कहना है कि यह एक प्रमुख निर्माण है जो कि मील का पत्थर साबित होगा।