दिल्ली-एनसीआर में आने वाले वर्षों में परिवहन व्यवस्था पूरी तरह बदल सकती है। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने 2030 तक एयर टैक्सी, ड्रोन नेटवर्क और अर्बन एयर मोबिलिटी को बढ़ावा देने का विजन तैयार किया है। इसका मकसद ट्रैफिक जाम कम करना और तेज, आधुनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करना है।
छतों पर बनेंगे वर्टीपोर्ट और हेलिपैड
योजना के तहत प्रमुख रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन और बड़े बस अड्डों की छतों पर वर्टीपोर्ट बनाए जाएंगे, जहां एयर टैक्सियां उड़ान भरेंगी और उतरेंगी। वहीं, जिला मुख्यालयों और प्रमुख इमारतों पर हेलिपैड व ड्रोन हब विकसित करने की भी तैयारी है। इसके लिए सुरक्षा मानकों और विमानन नियमों का पालन किया जाएगा।
ड्रोन से पहुंचेगा सामान, आपातकाल में मिलेगी मदद
ड्रोन नेटवर्क के जरिए ई-कॉमर्स कंपनियां घर-घर तेज डिलीवरी कर सकेंगी। वहीं पुलिस ट्रैफिक और सुरक्षा की हवाई निगरानी करेगी। बाढ़, आग, मेडिकल इमरजेंसी जैसी परिस्थितियों में दवाइयां, राहत सामग्री और जरूरी सेवाएं भी ड्रोन व एयर नेटवर्क के जरिए तेजी से पहुंचाई जा सकेंगी।
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ग्रीन टेक्नोलॉजी पर रहेगा फोकस
योजना में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी और हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक को प्राथमिकता दी गई है। इनके लिए चार्जिंग और ईंधन से जुड़ा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा, ताकि भविष्य में पर्यावरण अनुकूल हवाई परिवहन को बढ़ावा मिल सके।
एयरपोर्ट से सीधे जुड़ेगा पूरा NCR
इस मास्टर प्लान का उद्देश्य नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद और अलवर जैसे प्रमुख शहरों को सीधे दिल्ली के IGI एयरपोर्ट और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से जोड़ना है। यदि योजना तय समय पर लागू होती है, तो 2030 तक दिल्ली-एनसीआर में यात्रा, लॉजिस्टिक्स और शहरी परिवहन का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है।