दिल्ली में आज नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) प्लानिंग बोर्ड की 42वीं बैठक होने जा रही है, जिसमें एनसीआर के दायरे में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा जाएगा। प्रस्ताव के मुताबिक दिल्ली से 100 किलोमीटर के दायरे तक ही मुख्य एनसीआर क्षेत्र सीमित किया जा सकता है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो हरियाणा के पांच जिले एनसीआर के दायरे से बाहर हो सकते हैं। बैठक में क्षेत्रीय विकास, स्मार्ट शहरों और भविष्य की शहरी योजनाओं पर भी चर्चा होगी।
ड्राफ्ट रीजनल प्लान-2041 से जुड़ा है पूरा मामला
एनसीआर की सीमाओं में बदलाव का प्रस्ताव ड्राफ्ट रीजनल प्लान-2041 का हिस्सा है। इस योजना के तहत दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के विकास को नए सिरे से परिभाषित करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का उद्देश्य एनसीआर के नियोजित और संतुलित विकास को सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
क्या है 100 किलोमीटर वाला प्रस्ताव?
फिलहाल एनसीआर का दायरा दिल्ली की सीमा से करीब 150 से 175 किलोमीटर तक फैला हुआ है और इसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कई जिले शामिल हैं। नए प्रस्ताव के तहत दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर के हवाई दायरे तक के क्षेत्रों को ही मुख्य एनसीआर का हिस्सा रखने की बात कही गई है। इसके बाहर के इलाकों को मुख्य एनसीआर क्षेत्र से अलग किया जा सकता है।
हरियाणा के पांच जिलों पर पड़ सकता है असर
प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में हरियाणा के पानीपत, चरखी दादरी, जींद समेत पांच जिलों पर सीधा असर पड़ सकता है। अभी एनसीआर में हरियाणा के 14 जिले शामिल हैं, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने पर राज्य का एनसीआर क्षेत्र काफी घट सकता है।
60 फीसदी तक घट सकता है हरियाणा का एनसीआर क्षेत्र
नए प्रस्ताव के अनुसार हरियाणा का एनसीआर क्षेत्र 25,327 वर्ग किलोमीटर से घटकर लगभग 10,546 वर्ग किलोमीटर रह सकता है। यानी राज्य के एनसीआर क्षेत्र में करीब 60 प्रतिशत की कमी आ सकती है। इससे क्षेत्रीय विकास योजनाओं, निवेश और बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं पर भी असर पड़ने की संभावना है।
बैठक में हो सकते हैं कई बड़े फैसले
विज्ञान भवन में होने वाली इस बैठक में दिल्ली, हरियाणा समेत विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो सकते हैं। बैठक में 30 मिनट एनसीआर की अवधारणा, आठ स्मार्ट शहरों के विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने जैसे प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा। आज की बैठक के फैसले एनसीआर के भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं।