Delhi-NCR Pollution: दिल्ली-NCR में दिवाली से पहले वायु प्रदूषण ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है। कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुंचने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुबह और शाम के समय हवा में प्रदूषण की मोटी परत महसूस की जा रही है। सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याओं की शिकायतें भी बढ़ रही हैं। प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन की ओर से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद हवा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है।
रोहिणी और IIT दिल्ली में प्रदूषण सबसे ज्यादा, कई स्टेशन गंभीर श्रेणी में
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, 6 नवंबर को दिल्ली का 24 घंटे का औसत AQI 382 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। हालांकि, राजधानी के कई मॉनिटरिंग स्टेशनों पर स्थिति इससे भी ज्यादा चिंताजनक रही। IIT दिल्ली और रोहिणी में AQI 474 तक पहुंच गया, जबकि पंजाबी बाग में 465, आरके पुरम में 443, ITO में 422 और इंडिया गेट के आसपास 403 दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से साफ है कि दिल्ली के कई हिस्सों में हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच चुकी है।
GRAP-3 लागू, निर्माण कार्यों और वाहनों पर बढ़ेंगी पाबंदियां
लगातार बिगड़ती हवा को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 6 नवंबर को पूरे दिल्ली-NCR में तत्काल प्रभाव से GRAP-3 लागू कर दिया। इसके तहत धूल फैलाने वाली निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। कुछ श्रेणियों के पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लागू होंगे। इसके अलावा स्टोन क्रशर और प्रदूषण फैलाने वाले औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर सख्ती की जाएगी। निजी कंपनियों को कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड व्यवस्था अपनाने की सलाह दी गई है। पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए हाइब्रिड या ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प भी लागू किया गया है।
आने वाले दिनों में और बिगड़ सकती है हवा, लोगों को सतर्क रहने की सलाह
प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद फिलहाल कम नजर आ रही है। मौसम और वायु गुणवत्ता के पूर्वानुमान के अनुसार, 7 से 9 नवंबर के बीच दिल्ली की हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच सकती है। दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण की समस्या को और बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आपातकालीन प्रतिबंधों से इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों की धूल और पराली जलाने जैसी गतिविधियों पर लगातार नियंत्रण जरूरी है। ऐसे में दिल्ली-NCR के लोगों को फिलहाल प्रदूषण से बचाव के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है।