दिल्ली-NCR में रविवार को प्रदूषण ने खतरनाक रूप ले लिया. कई इलाकों में AQI 420 के पार पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी मानी जाती है. रोहिणी, नेहरू नगर, बवाना, RK पुरम और ITO जैसे इलाकों में जहरीली हवा की परत छाई रही. दिल्ली का औसत AQI 391 दर्ज हुआ, जबकि नोएडा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम में भी हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी के करीब पहुंच गई. लगातार खराब होती हवा का असर सबसे ज़्यादा बच्चों, बुजुर्गों और दमा के मरीजों पर दिख रहा है. खांसी, सांस की दिक्कत, गले में जलन जैसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.
पराली और पावर प्लांट पर सख्ती, लेकिन खतरा कम नहीं
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति का कहना है कि इस साल नवंबर में परिस्थितियां पिछले साल की तुलना में थोड़ी बेहतर हैं, लेकिन प्रदूषण का खतरा अभी भी जस का तस है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पंजाब में पराली जलाने पर सख्त एक्शन की मांग की है. इसके साथ ही बठिंडा के लहरा मोहब्बत पावर प्लांट को चेतावनी दी गई है कि प्रदूषण मानकों का पालन नहीं हुआ तो उसे बंद किया जा सकता है. हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में कमी दर्ज की गई है, लेकिन पंजाब में अभी भी कई जगहों पर धुएं के स्रोत मिल रहे हैं, जो दिल्ली की हवा को लगातार ज़हरीला बना रहे हैं.
दफ्तरों का टाइम बदला, वर्क फ्रॉम होम की अपील
बढ़ते प्रदूषण के बीच दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने लोगों से कारपूलिंग करने और निजी कंपनियों से वर्क फ्रॉम होम देने की अपील की है. इससे पहले सरकार अपने कर्मचारियों के दफ्तर के समय में बदलाव कर चुकी है. नई समय सीमा 15 नवंबर 2025 से 15 फरवरी 2026 तक लागू रहेगी. सरकारी दफ्तर 10:00 AM से 6:30 PM तक और MCD दफ्तर 8:30 AM से 5:00 PM तक खुलेंगे. इस कदम का मकसद ट्रैफिक कम करना और वाहन उत्सर्जन घटाना है, जो दिल्ली के प्रदूषण में बड़ी हिस्सेदारी करता है.
अगला प्लान- घर से काम और ट्रैफिक कंट्रोल
सरकार का फोकस अब सड़कों पर वाहनों की संख्या घटाने पर है. वर्क फ्रॉम होम, कारपूलिंग और ऑफिस शिफ्ट में बदलाव जैसे कदम उसी रणनीति का हिस्सा हैं. रेखा सरकार चाहती है कि ज़रूरी सेवा छोड़ बाकी लोगों को अधिकतम घर से काम दिया जाए, जिससे प्रदूषण के स्तर को रोका जा सके. अगर हालात नहीं सुधरे तो अतिरिक्त पाबंदियां भी लगाई जा सकती हैं.