दिल्ली हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद यमुना के डूब क्षेत्र यानी O-Zone में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू हुई है। मजनू का टीला, जगतपुर, वजीराबाद और मोनेस्ट्री मार्केट जैसे इलाकों में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया गया है। इसी के बाद लाखों लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि उनका घर किस जोन में आता है और कहीं वह भी कार्रवाई की जद में तो नहीं है।
दिल्ली को 15 जोनों में बांटा गया है
दिल्ली विकास प्राधिकरण के मास्टर प्लान के मुताबिक राजधानी को A से P तक कुल 15 प्लानिंग जोनों में बांटा गया है। पुरानी दिल्ली का इलाका Zone-A में आता है, जबकि करोल बाग और पटेल नगर Zone-B में शामिल हैं। उत्तर दिल्ली के कई प्रमुख इलाके Zone-C में आते हैं। वहीं कनॉट प्लेस, चाणक्यपुरी और लुटियंस दिल्ली को Zone-D में रखा गया है।
पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली किस जोन में?
शाहदरा, लक्ष्मी नगर, मयूर विहार और आनंद विहार जैसे इलाके Zone-E का हिस्सा हैं। वहीं साकेत, ग्रेटर कैलाश, हौज खास, वसंत कुंज और नेहरू प्लेस Zone-F में आते हैं। पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी, राजौरी गार्डन, विकासपुरी और उत्तम नगर को Zone-G में रखा गया है।
सबसे ज्यादा चर्चा O-Zone की क्यों?
दिल्ली का Zone-O सबसे संवेदनशील माना जाता है क्योंकि यह यमुना नदी का फ्लड प्लेन यानी डूब क्षेत्र है। मजनू का टीला, जगतपुर, वजीराबाद और मदनपुर खादर के कई हिस्से इसी जोन में आते हैं। हालिया बुलडोजर कार्रवाई भी इन्हीं इलाकों में हुई है। नियमों के मुताबिक यहां निर्माण गतिविधियों पर विशेष प्रतिबंध लागू रहते हैं।
इन इलाकों के लोग जरूर करें जांच
अगर आपका घर यमुना किनारे या उससे सटे क्षेत्रों में है तो अपने इलाके का जोन जरूर जांच लें। बुराड़ी, जगतपुर, वजीराबाद, सोनिया विहार, मजनू का टीला और मदनपुर खादर के लोगों में सबसे ज्यादा चिंता देखी जा रही है। DDA के मास्टर प्लान और जोनल मैप के जरिए यह जानकारी आसानी से हासिल की जा सकती है।
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घर खरीदने से पहले सबसे जरूरी जांच
विशेषज्ञों का कहना है कि घर खरीदते समय सिर्फ लोकेशन, कीमत और कनेक्टिविटी नहीं बल्कि जोनल स्थिति की भी जांच करनी चाहिए। O-Zone में चल रही कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि किसी भी संपत्ति की कानूनी स्थिति और उसका जोन भविष्य में सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है। दिल्ली में रियल एस्टेट निवेश करने वालों के लिए यह एक बड़ा सबक माना जा रहा है।