दिल्ली में मोबाइल और इंटरनेट से जुड़ा डर अब कम होने वाला है। महिलाओं और छात्रों के खिलाफ बढ़ते ऑनलाइन अपराधों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सिस्टम बदलने का फैसला किया है। अब फोटो मॉर्फिंग, ऑनलाइन छेड़छाड़, अश्लील मैसेज या बच्चों से जुड़े डिजिटल अपराधों के मामलों में पीड़ितों को भटकना नहीं पड़ेगा। पुलिस का मकसद साफ है कि शिकायत करने वाला व्यक्ति डर और झंझट से बाहर निकले और उसे तुरंत मदद मिले।
अब साइबर थानों के चक्कर नहीं
अब तक हाल यह था कि ऑनलाइन अपराधों की शिकायतें उन्हीं साइबर थानों में जाती थीं, जहां हजारों ठगी के केस पहले से जमा रहते थे। ऐसे में महिलाओं और बच्चों से जुड़े गंभीर मामले दबकर रह जाते थे। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए बार-बार थाने जाना आसान नहीं होता था। इसी समस्या को खत्म करने के लिए दिल्ली पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है।
SPUWAC को मिली नई जिम्मेदारी
दिल्ली पुलिस की स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर विमेन एंड चिल्ड्रन यानी SPUWAC को अब डिजिटल अपराधों से निपटने की पूरी ताकत दी जा रही है। यह यूनिट अब सिर्फ घरेलू हिंसा या दहेज के मामलों तक सीमित नहीं रहेगी। ऑनलाइन अश्लीलता, मॉर्फिंग, डिजिटल ब्लैकमेलिंग और बच्चों के यौन शोषण जैसे मामलों की पूरी जिम्मेदारी अब इसी यूनिट के पास होगी।
शिकायत से कोर्ट तक एक ही रास्ता
नई व्यवस्था में शिकायत लेना, एफआईआर दर्ज करना, जांच करना और कोर्ट में केस लड़ना सब कुछ SPUWAC ही करेगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि पीड़ित को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। न्याय की प्रक्रिया तेज होगी और केस को गंभीरता से आगे बढ़ाया जाएगा। पुलिस का मानना है कि इससे अपराधियों में डर और पीड़ितों में भरोसा पैदा होगा।
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आंकड़ों ने दिखाई सिस्टम की कमजोरी
ऑनलाइन अपराध के आंकड़े बताते हैं कि बदलाव क्यों जरूरी था। अगस्त 2023 से अब तक बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी 26 हजार से ज्यादा रिपोर्ट सामने आईं, लेकिन बहुत कम मामलों में एफआईआर दर्ज हो सकी। कई केस फाइलों में दबकर रह गए। यही वजह है कि अब SPUWAC को मजबूत बनाकर इस कमजोरी को दूर करने की कोशिश की जा रही है।
हर जिले में बनेगा सुरक्षा चक्र
इस प्लान का असर सिर्फ चुनिंदा इलाकों तक सीमित नहीं रहेगा। दिल्ली के सभी 15 पुलिस जिलों में SPUWAC का अलग विभाग बनेगा। यहां खास जांच अधिकारी, साइबर फॉरेंसिक सुविधा और संवेदनशील मामलों को समझने वाला स्टाफ होगा। इसका सबसे बड़ा फायदा गरीब परिवारों, छात्राओं और कामकाजी महिलाओं को मिलेगा। अब ऑनलाइन दुनिया में भी अपराधियों को साफ संदेश है कि बच निकलने के रास्ते बंद हो रहे हैं।