New Delhi: राजधानी दिल्ली में साइकोट्रॉपिक दवाओं के अवैध नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने पटना में फर्जी दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। इस ऑपरेशन में फैक्ट्री से बड़ी मात्रा में नकली सिरप, रसायन और उपकरण बरामद किए गए। इस कार्रवाई में अब तक 8 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
फर्जी फैक्ट्री और बड़ी बरामदगी
डीसीपी संजीव कुमार यादव के मुताबिक पटना में चल रही इस फैक्ट्री में नकली दवाओं और सिरप का उत्पादन किया जा रहा था।
मौके से बरामद सामग्री में शामिल हैं:
हजारों बोतलें नकली सिरप की सैकड़ों लीटर रसायन वाणिज्यिक आकार के मिक्सिंग उपकरण,रसायन रखने के ड्रम/कैनिस्टर,हजारों खाली बोतलें और कैप्स। इस फैक्ट्री का संचालन 24 वर्षीय तनिष्क झा कर रहा था, जो बड़े पैमाने पर रसायन और नकली दवाओं का परिवहन कर रहा था।
जांच और गिरफ्तारी का क्रम
जांच पिछले साल सितंबर में शुरू हुई थी, जब सब-इंस्पेक्टर विकास दीप को दिल्ली के लाजपत नगर में अवैध रूप से ट्रामाडोल पाउडर ले जाते हुए अनिरुद्ध के बारे में सूचना मिली। लगभग 2 किलो ट्रामाडोल बरामद किया गया और मामला दर्ज किया गया। उसके बाद तकनीकी और मानव निगरानी से पता चला कि तनिष्क झा पटना में अपने पिता की फैक्ट्री से बड़े पैमाने पर फर्जी साइकोट्रॉपिक दवाएं बना रहा है। इंस्पेक्टर नितेश कुमार की टीम, एसआई विकास दीप के नेतृत्व में, तुरंत पटना रवाना हुई और फैक्ट्री से तनिष्क झा को गिरफ्तार किया।
पूर्व गिरफ्तारी और अंतरराज्यीय कार्रवाई
इससे पहले 7 अन्य आरोपी विभिन्न राज्यों से गिरफ्तार किए जा चुके हैं। उनके कब्जे से 48 किलो से अधिक साइकोट्रॉपिक रसायन/दवाएं बरामद हुईं, जिनकी कीमत लगभग 50 करोड़ रुपये आंकी गई।
इस गैंग का काम करने का तरीका यह था कि ये अवैध रूप से बड़ी मात्रा में रसायन खरीदकर उसे नकली दवाओं में बदलते और बिना प्रिस्क्रिप्शन के बेचते थे। तनिष्क झा के पिता अन्य नकली सिरप बनाने वाली फैक्ट्री चला रहे थे, जिनके नाम प्रसिद्ध दवाओं से थोड़े बदलकर रखे गए थे।
मुख्य आरोपी की जानकारी
तनिष्क झा, उम्र 24 साल, बिहार निवासी, पिता की फैक्ट्री का बहाना बनाकर बड़े पैमाने पर साइकोट्रॉपिक रसायन का परिवहन
जांच अभी जारी है
क्राइम ब्रांच का कहना है कि यह कार्रवाई साइकोट्रॉपिक दवाओं और नशीले पदार्थों की अंतरराज्यीय तस्करी में लगे बड़े नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में अहम कदम है। जांच अभी जारी है और अन्य अपराधियों को पकड़ने के लिए सुराग जुटाए जा रहे हैं। इस ऑपरेशन से यह साफ हो गया है कि नकली और अवैध दवाओं का कारोबार आम लोगों की जिंदगी के लिए गंभीर खतरा है।