Thane Singh Free School : दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल थान सिंह की कहानी इन दिनों लोगों का ध्यान खींच रही है। वह अपनी पुलिस की ड्यूटी निभाने के साथ-साथ उन बच्चों को पढ़ाने का काम करते हैं, जिनके लिए स्कूल जाना आसान नहीं है। लाल किले के आसपास रहने वाले गरीब और मजदूर परिवारों के कई बच्चे कभी पढ़ाई से दूर थे। थान सिंह ने ऐसे बच्चों के लिए पढ़ाई का रास्ता खोलने की कोशिश की। उनकी पहल को लेकर हाल में सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा हो रही है।
चार बच्चों से शुरू हुआ सफर
थान सिंह ने साल 2015 में सिर्फ चार बच्चों से इस पाठशाला की शुरुआत की थी। उन्होंने आसपास ऐसे बच्चों को देखा था, जो पढ़ने की उम्र में कचरा बीनने या छोटे-मोटे काम में लगे रहते थे। बच्चों की हालत देखकर उन्होंने तय किया कि अगर उन्हें स्कूल तक पहुंचाना है तो शुरुआत उन्हें पढ़ाने से ही करनी होगी। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ती गई और यह छोटा सा प्रयास एक बड़ी पहल में बदल गया।
किताबों के साथ मिलती है नई उम्मीद
इस पाठशाला में बच्चों को सिर्फ पढ़ाया ही नहीं जाता, बल्कि उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए तैयार भी किया जाता है। यहां बच्चों को बुनियादी पढ़ाई, भाषा और गणित जैसी चीजें सिखाई जाती हैं। जरूरत के हिसाब से किताबें, कॉपियां और दूसरी पढ़ाई की सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। कई बच्चों को आगे चलकर नियमित स्कूलों से जोड़ने में भी मदद मिली है।
बच्चों के लिए बदल रही है जिंदगी
थान सिंह की कोशिश का असर उन बच्चों की जिंदगी में साफ दिखाई देता है, जो पहले पढ़ाई से दूर थे। कई बच्चे अब नियमित स्कूल जा रहे हैं और अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं। 2026 में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी पाठशाला से जुड़ी एक छात्रा ने दसवीं की परीक्षा पास की और अपनी सफलता की खबर मां को दी। यह पल इस पहल की असली सफलता को दिखाता है।
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एक इंसान की पहल बनी बड़ी मिसाल
थान सिंह की कहानी यह बताती है कि किसी की जिंदगी बदलने के लिए हमेशा बड़े साधनों की जरूरत नहीं होती। सालों पहले चार बच्चों से शुरू हुई उनकी कोशिश अब 200 से ज्यादा बच्चों तक पहुंचने की खबरों के साथ एक बड़ी मुहिम बन चुकी है। उनकी पाठशाला बच्चों को सिर्फ अक्षर और नंबर नहीं सिखा रही, बल्कि उन्हें बेहतर भविष्य का सपना देखने का मौका भी दे रही है। यही वजह है कि खाकी वर्दी में शिक्षक बने थान सिंह की कहानी लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है।