Delhi Pollution Rules November 2026 : दिल्ली में सर्दियों से पहले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। अक्टूबर में हवा की गुणवत्ता में बदलाव और आने वाले दिनों में स्मॉग बढ़ने की आशंका के बीच कई सख्त कदम उठाए जाने की चर्चा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 1 नवंबर 2026 से वर्क फ्रॉम होम, वाहनों की जांच और निर्माण कार्यों पर रोक जैसे उपाय लागू किए जाने की बात कही गई है। इन कदमों का मकसद धूल, वाहनों से निकलने वाले धुएं और पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करना है। हालांकि, इन नियमों की अंतिम स्थिति और लागू होने की तारीख की पुष्टि आधिकारिक आदेशों से करना जरूरी है।
सरकारी और निजी दफ्तरों में WFH
दी गई जानकारी के अनुसार, दिल्ली में सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम करने की व्यवस्था लागू करने की योजना बताई गई है। इसके तहत आधे कर्मचारी कार्यालय में और बाकी घर से काम कर सकते हैं। कार्यालयों के समय में बदलाव की भी बात कही गई है। एमसीडी और स्थानीय निकायों के कार्यालय सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक, जबकि दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक चलने का उल्लेख है। निजी कार्यालयों के लिए नियमों का पूरा विवरण स्पष्ट होना बाकी है।
PUC के बिना नहीं मिलेगा ईंधन
प्रस्तावित उपायों में ‘नो पीयूसी-नो फ्यूल’ नियम भी शामिल है। इसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUC के बिना वाहनों को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं देने की बात कही गई है। इसके लिए पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन यानी ANPR कैमरों के इस्तेमाल का भी जिक्र है। ये कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पढ़कर उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड से जानकारी का मिलान कर सकते हैं। वाहन चालकों को सलाह है कि वे अपने प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता जांच लें और समय पर उसे अपडेट कराएं।
बाहरी वाहनों और निर्माण पर पाबंदी
जानकारी के मुताबिक, 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-4 से नीचे के मानकों वाले पेट्रोल और डीजल वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने की योजना बताई गई है। इसमें एनसीआर और दूसरे राज्यों से आने वाले वाहन भी शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, इसी अवधि में निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी गतिविधियों पर रोक का उल्लेख है। ऐसी पाबंदियों का उद्देश्य निर्माण स्थलों से उठने वाली धूल को नियंत्रित करना है। हालांकि, वाहन श्रेणियों, छूट और निर्माण गतिविधियों पर लागू प्रतिबंधों की सही जानकारी संबंधित सरकारी आदेश से ही स्पष्ट होगी।
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पराली जलाने और प्रदूषण वाले इलाकों पर नजर
दिल्ली के प्रदूषण में वाहनों और धूल के अलावा पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं का भी योगदान हो सकता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने पर निगरानी के लिए 300 टीमों के गठन का जिक्र किया गया है। वहीं, दिल्ली की सीमाओं पर 13 हॉटस्पॉट चौकियां बनाने और आनंद विहार, वजीरपुर, मुंडका तथा आरके पुरम जैसे प्रदूषण प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है। इन कदमों का उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई करना है।
आधिकारिक आदेश देखना जरूरी
सर्दियों में हवा की गति कम होने और प्रदूषकों के जमा होने से दिल्ली में स्मॉग की समस्या गंभीर हो सकती है। ऐसे में वाहनों, निर्माण कार्यों और पराली जलाने पर निगरानी महत्वपूर्ण है। लेकिन वर्क फ्रॉम होम, वाहनों के प्रवेश और निर्माण पर रोक जैसे नियमों को लागू मानने से पहले दिल्ली सरकार तथा संबंधित प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों के आधिकारिक आदेशों की पुष्टि जरूरी है। नागरिकों को नियमों की तारीख, दायरे और छूट से जुड़ी जानकारी सरकारी घोषणाओं के आधार पर ही माननी चाहिए।