दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI इस सीजन पहली बार सीवियर श्रेणी में पहुंच गया है। इसी को देखते हुए नगर निगम दिल्ली ने प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को और तेज कर दिया है। अब सड़कों पर एंटी-स्मॉग गन, मैकेनिकल रोड स्वीपर और वॉटर स्प्रिंकलर के जरिए हवा में मौजूद धूल और धुएं को कम करने की कोशिशें जारी हैं। अधिकारियों का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
व्यापार जगत को रोजाना 100 करोड़ का नुकसान
दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण ने सिर्फ आम लोगों की सेहत ही नहीं, बल्कि कारोबार पर भी असर डाला है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बताया कि राजधानी के व्यापार को प्रदूषण की वजह से प्रतिदिन लगभग 100 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के 20 लाख व्यापारी सरकार के साथ मिलकर प्रदूषण नियंत्रण में योगदान देने को तैयार हैं। एमसीडी अब पार्किंग शुल्क दोगुना करने पर भी विचार कर रही है ताकि लोग निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करें और सड़क पर ट्रैफिक घटे।
नियम तोड़ने पर लगेगा 50,000 तक जुर्माना
एमसीडी और राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी NGT ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण फैलाने वालों पर 5,000 से 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। निगम की टीमें निर्माण स्थलों, औद्योगिक इलाकों और सड़कों पर निगरानी रख रही हैं ताकि कचरा जलाने या धूल फैलाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। फिलहाल एमसीडी के पास 6,130 किलोमीटर लंबी सड़कों की सफाई की जिम्मेदारी है, जिसके लिए 57,000 कर्मचारी तैनात हैं। धूल नियंत्रण के लिए 3,400 किलोमीटर सड़कों पर 52 मैकेनिकल स्वीपर और 28 मोबाइल व 20 स्थिर एंटी-स्मॉग गन लगाए गए हैं।
दिल्ली का AQI ‘सीवियर’ श्रेणी में
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, बवाना, वजीरपुर, मुंडका और पंजाबी बाग जैसे इलाकों में एयर क्वालिटी ‘गंभीर’ स्तर पर दर्ज की गई है। सरकार और एमसीडी ने नागरिकों से अपील की है कि वे प्रदूषण फैलाने वाले कार्यों से बचें। नियमों का उल्लंघन करने वालों को भारी जुर्माने और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। अधिकारियों का कहना है कि सामूहिक सहयोग से ही दिल्ली की हवा को फिर से सांस लेने लायक बनाया जा सकता है।