
दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं। पहाड़ी राज्यों में मूसलाधार बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में भी साफ दिखाई दे रहा है। यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग 2 मीटर ऊपर पहुंच चुका है, जिससे दिल्ली में बाढ़ का खतरा और गहरा गया है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि 6 सितंबर तक तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो सकती है।
रिहायशी इलाकों तक पहुंचा पानी
यमुना नदी का पानी अब दिल्ली के रिहायशी इलाकों में घुस चुका है। हालात और खराब हो सकते हैं क्योंकि हथिनी कुंड बैराज से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। गुरुवार को ही यहां से 1.34 लाख क्यूसेक पानी, वज़ीराबाद बैराज से 1.93 लाख क्यूसेक और ओखला बैराज से 2.44 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और निचले इलाकों में हालात गंभीर होते जा रहे हैं।
सचिवालय और CM ऑफिस तक पहुंची बाढ़
दिल्ली में स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि बाढ़ का पानी अब दिल्ली सचिवालय और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। पुराने रेलवे पुल पर यमुना का जलस्तर गुरुवार को 207.47 मीटर पर दर्ज किया गया। अधिकारियों का कहना है कि पानी का स्तर धीरे-धीरे कम हो सकता है, लेकिन तब तक कई इलाके जलमग्न रहेंगे और लोगों को राहत शिविरों में ही ठहरना होगा।
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राहत शिविरों में हजारों लोग
बाढ़ से सबसे ज्यादा असर निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों पर पड़ा है। दिल्ली के जैतपुर इलाके में बने राहत शिविरों का निरीक्षण करने पहुंचे संभागीय आयुक्त और DM नीरज सेमवाल ने बताया कि इस वक्त शहर में करीब 60-70 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां लगभग 10-12 हजार लोग ठहरे हुए हैं। यहां खाने-पीने से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं तक की व्यवस्था की गई है। डॉक्टरों की टीम लगातार कैंपों में तैनात है और मवेशियों के लिए भी खास इंतजाम किए गए हैं।
पंजाब और उत्तर भारत में भी हालात खराब
दिल्ली ही नहीं, पंजाब समेत कई राज्यों में बारिश और बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। खेत डूब गए हैं, गांवों में पानी भर गया है और कई जगह सड़कें टूटने से आवाजाही बंद हो गई है। लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर ने दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए आने वाले दिनों में लोगों को और सतर्क रहना होगा।