Delhi Violence 2020 ---दिल्ली दंगे 2020 में IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या को छह साल बीत चुके हैं, लेकिन उनका परिवार आज भी उस दर्दनाक शाम को भुला नहीं पाया है। अदालत ने मामले में दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, लेकिन अंकित के परिवार के लिए यह फैसला खुशी से ज्यादा एक अधूरी राहत जैसा है। बेटे को खोने का दर्द और उस रात की यादें आज भी परिवार के साथ हैं।
25 फरवरी 2020 की वो शाम, जिसने बदल दी परिवार की जिंदगी
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान 25 फरवरी 2020 को IB अधिकारी अंकित शर्मा ड्यूटी से लौटे थे। इलाके में तनाव और हिंसा का माहौल था। शाम करीब साढ़े चार बजे अंकित घर पहुंचे। परिवार भी बाहर हो रही घटनाओं को लेकर चिंतित था। मां ने बेटे से उसकी कुशलता पूछी तो अंकित ने बताया कि विभाग की ओर से उन्हें आसपास के हालात देखने के लिए कहा गया है।
किसी को अंदाजा नहीं था कि घर से बाहर जाते समय हुई यह बातचीत परिवार के लिए आखिरी याद बन जाएगी।
रातभर तलाशते रहे परिजन, फिर मिली दर्दनाक खबर
अंकित के घर से निकलने के बाद काफी देर तक उनका कोई पता नहीं चला। शुरुआत में परिवार को उम्मीद थी कि शायद वह किसी परिचित के यहां रुक गए होंगे या किसी काम में व्यस्त होंगे। लेकिन जब सभी जगह तलाश की गई तो चिंता बढ़ने लगी।
बाद में अंकित का शव घर से कुछ दूरी पर एक नाले से बरामद हुआ। इस घटना ने पूरे परिवार को तोड़ दिया। परिवार का कहना है कि जिस तरह अंकित की जान गई, उसका दर्द कभी कम नहीं हो सकता।
छोटे शहर से दिल्ली आए थे, यहीं बनाया था अपना भविष्य
अंकित शर्मा का परिवार करीब दो दशक पहले उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से दिल्ली आया था। उस समय अंकित और उनके भाई अंकुर काफी छोटे थे। पिता गृह मंत्रालय में कार्यरत थे, जिसके कारण परिवार दिल्ली के खजूरी खास इलाके में रहने लगा।
दिल्ली की गलियों में बचपन बिताने वाले दोनों भाइयों ने यहीं पढ़ाई की और अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश की। अंकित ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज से शिक्षा हासिल की और बाद में केंद्रीय खुफिया विभाग में नौकरी हासिल की।
देश सेवा का सपना, लेकिन अधूरी रह गई जिंदगी की कहानी
साल 2016 में अंकित ने IB की परीक्षा पास की और 2017 में असिस्टेंट सेंट्रल इंटेलिजेंस ऑफिसर के तौर पर अपनी सेवाएं शुरू कीं। परिवार को उम्मीद थी कि अंकित जल्द ही आगे बढ़ेंगे और करियर में नई ऊंचाइयां हासिल करेंगे।
लेकिन फरवरी 2020 की हिंसा ने सब कुछ बदल दिया। घटना के बाद परिवार ने अपना पुराना इलाका भी छोड़ दिया। जिन गलियों में बचपन की यादें थीं, वही जगह अब परिवार के लिए दर्द की वजह बन गई।
सrजा मिली, लेकिन परिवार के लिए दर्द आज भी कायम
अंकित के भाई अंकुर का कहना है कि अदालत का फैसला आने के बाद भी उनके परिवार के जख्म नहीं भर सकते। उनके लिए यह केवल कानूनी प्रक्रिया का एक पड़ाव है, क्योंकि जिस व्यक्ति ने देश की सेवा करते हुए अपनी जान गंवाई, वह अब कभी वापस नहीं आएगा।
छह साल बाद भी मां की आंखों में बेटे को खोने का दर्द साफ दिखाई देता है। परिवार के लिए न्याय की लड़ाई जारी है, लेकिन अंकित की यादें हमेशा उनके साथ रहेंगी।