Satya Niketan Building Collapse : दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की दर्दनाक घटना ने सात परिवारों की जिंदगी बदल दी। करीब 27 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मलबे से सात शव निकाले गए, जिनमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के पांच छात्र भी शामिल हैं। महज 16 से 20 साल की उम्र में इन युवाओं की जिंदगी खत्म हो गई। किसी ने IPS बनने का सपना देखा था तो कोई अपने परिवार का इकलौता बेटा था। हादसे में पांच लोग घायल हैं, जिनमें तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है।
27 घंटे तक मलबे में जिंदगी की तलाश, लेकिन सात घरों में पसरा मातम
दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई और देखते ही देखते कई लोग मलबे के नीचे दब गए। हादसे की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा और मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार करीब 27 घंटे तक चला। बचाए गए लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया और कुल 12 लोगों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया। हालांकि, कोशिशों के बावजूद सात लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। इनमें पांच दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र थे, जो अलग-अलग कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे थे और सत्य निकेतन की इसी बिल्डिंग में किराए पर रह रहे थे। एम्स में पोस्टमार्टम के बाद मृतकों की पहचान सामने आई। पांच छात्रों के अलावा दो मजदूरों की भी मौत हुई, जबकि एक मृतक की पहचान अभी नहीं हो सकी है। हादसे में घायल पांच लोगों का इलाज जारी है और इनमें तीन की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है।
रक्षाबंधन मनाकर दिल्ली लौटा अर्पित
हादसे में जान गंवाने वालों में मध्य प्रदेश के देवास जिले के अर्पित राज और छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर के युवराज सोनी भी शामिल थे। अर्पित रक्षाबंधन की छुट्टियां मनाकर अपने घर से दिल्ली लौटे ही थे। परिवार के लिए यह सामान्य वापसी थी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद आई हादसे की खबर ने सबकुछ बदल दिया। जिस बेटे के लौटने पर घर में खुशी थी, उसी बेटे की मौत की खबर ने परिवार को तोड़ दिया। वहीं दुर्ग के रहने वाले युवराज सोनी अपने पिता की दवा दुकान के इकलौते बेटे थे। परिवार को उनसे भविष्य की बड़ी उम्मीदें थीं और पढ़ाई पूरी करने के बाद वह परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाने वाले थे। हादसे में उत्तर प्रदेश के अभिषेक कुमार और औरैया जिले के पवन कुमार की भी मौत हुई। पवन मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीएससी के छात्र थे, जबकि अभिषेक सोनभद्र जिले के रेणुकूट इलाके के रहने वाले थे। पांचों छात्र महज 16 से 20 साल की उम्र के थे और अपने बेहतर भविष्य के लिए दिल्ली में पढ़ाई कर रहे थे।
होनहार था अक्षत, फुटबॉल और भाषण में भी आगे, IPS बनने का देख रहा था सपना
मध्य प्रदेश के कटनी जिले के रहने वाले अक्षत सिंह यादव की कहानी भी इस हादसे को और दर्दनाक बना देती है। अक्षत बीकॉम के छात्र थे और उन्हें जानने वाले बताते हैं कि वह पढ़ाई में बेहद होनहार थे। पढ़ाई के साथ उनकी रुचि फुटबॉल और भाषण देने में भी थी। उनका सपना IPS अधिकारी बनने का था और वह अपने भविष्य को लेकर काफी गंभीर थे। हादसे की खबर मिलने के बाद परिवार को काफी देर तक यह नहीं पता था कि उनका बेटा मलबे में फंसा हुआ है। अक्षत की शिक्षिका सीमा यादव के मुताबिक परिवार को रात करीब 9 बजे उसके हादसे में फंसे होने की जानकारी मिली और अगले दिन सुबह करीब 9:30 बजे उसके निधन की पुष्टि हुई। अक्षत का पार्थिव शरीर कटनी स्थित उनके पैतृक घर पहुंचा तो परिवार और परिचितों के बीच मातम छा गया। जिस बेटे को परिवार एक दिन अधिकारी के रूप में देखना चाहता था, उसका सपना अधूरा रह गया। इस हादसे में दो मजदूर परम लाल कोरी और सुरेंद्र सिंह की भी मौत हुई। दोनों का पोस्टमार्टम एम्स ट्रॉमा सेंटर में किया गया और शव परिजनों को सौंप दिए गए।
बिल्डिंग मालिक परिवार गिरफ्तार
हादसे के बाद पुलिस ने बिल्डिंग मालिक परिवार के तीन सदस्यों हरिराम, उनकी पत्नी उर्मिला और उनके बेटे महेश को गिरफ्तार किया। तीनों को आरके पुरम थाने लाया गया और बाद में कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने हरिराम और उर्मिला गुप्ता को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि महेश गुप्ता को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब हादसे की वजह और इमारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर इमारत में कोई सुरक्षा खामी थी तो उसकी समय रहते जांच क्यों नहीं हुई? क्या सिर्फ बिल्डिंग मालिक की जिम्मेदारी थी या फिर निर्माण, मंजूरी और सुरक्षा मानकों की निगरानी से जुड़े विभागों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए? सत्य निकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र निजी PG में रहते हैं। ऐसे में छात्रों के पास यह पता लगाने का कोई आसान तरीका नहीं होता कि जिस बिल्डिंग में वे रह रहे हैं, वह सुरक्षित है या नहीं। हादसे ने PG बिल्डिंगों की नियमित जांच और सुरक्षा प्रमाण पत्रों की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डर के साए में छात्र, PG छोड़ कॉलेज पहुंचे
सत्य निकेतन हादसे के बाद आसपास के PG में रहने वाले छात्रों के बीच भी डर फैल गया है। कई छात्र अपने PG छोड़कर श्री वेंकटेश्वर कॉलेज पहुंचे, जहां फिलहाल उनके रहने और खाने की व्यवस्था की गई है। छात्रों का कहना है कि हादसे के बाद उन्हें अपनी बिल्डिंग की मजबूती पर भरोसा नहीं रह गया है और उन्हें यह तक पता नहीं होता कि उनके रहने की जगह की सुरक्षा की जांच आखिरी बार कब हुई थी। छात्रों ने प्रशासन से मांग की है कि सत्य निकेतन ही नहीं, बल्कि दिल्ली की सभी PG और किराए की इमारतों की तत्काल सुरक्षा जांच कराई जाए। जो इमारतें असुरक्षित पाई जाएं, उनमें रहने वाले छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाए और लापरवाही करने वाले PG संचालकों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो। इस हादसे में सात लोगों की मौत सिर्फ एक इमारत के गिरने की घटना नहीं है, बल्कि उन परिवारों के सपनों के टूटने की कहानी भी है, जिन्होंने अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए दिल्ली भेजा था। अब जरूरत इस बात की है कि हादसे के बाद सिर्फ कार्रवाई की घोषणा न हो, बल्कि ऐसी इमारतों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि किसी और परिवार को अपने बच्चे की मौत की खबर का इंतजार न करना पड़े।