Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में हुआ इमारत हादसा कई परिवारों के लिए ऐसा दुख लेकर आया, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। पांच मंजिला पीजी बिल्डिंग के अचानक ढहने से अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में मध्य प्रदेश के देवास के रहने वाले छात्र अर्पित जाज और छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी 20 वर्षीय युवराज सोनी भी शामिल हैं। दोनों ही छात्र कुछ दिन पहले रक्षाबंधन के मौके पर अपने घर पहुंचे थे। परिवार के साथ त्योहार मनाने के बाद वे पढ़ाई के लिए वापस दिल्ली लौटे थे। परिजनों को क्या पता था कि घर से दिल्ली की यह वापसी उनके जीवन का आखिरी सफर बन जाएगी।
देखते ही देखते मलबे में तब्दील हो गई पूरी इमारत
रविवार दोपहर सत्य निकेतन इलाके में उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब एक पांच मंजिला पीजी भवन अचानक ढह गया। कुछ ही पलों में पूरी इमारत मलबे के ढेर में बदल गई और उसके भीतर मौजूद लोग उसमें फंस गए। घटना की जानकारी मिलते ही दमकल विभाग और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचाव दल ने बिना समय गंवाए मलबा हटाने का काम शुरू किया। रविवार से सोमवार की रात तक लगातार रेस्क्यू अभियान चलाया गया। मलबे के अलग-अलग हिस्सों को खंगाला गया, ताकि किसी भी व्यक्ति के दबे होने की संभावना न रह जाए।
अर्पित के घर में पसरा मातम
हादसे में जान गंवाने वालों में देवास के छात्र अर्पित जाज भी थे। हादसे के बाद परिवार को पहले उनके इमारत में फंसे होने की जानकारी मिली थी। परिजन उम्मीद लगाए हुए थे कि शायद अर्पित सुरक्षित बाहर निकल आएंगे, लेकिन बाद में उनकी मौत की खबर ने परिवार को तोड़ दिया। अर्पित के पिता भूपेंद्र जाज ने बेटे के निधन की पुष्टि की है। बेटे की मौत की खबर मिलते ही देवास स्थित घर में मातम छा गया। परिवार अब अर्पित के पार्थिव शरीर को घर लाने की तैयारी में जुटा है।
बहन से राखी बंधवाकर दिल्ली लौटे थे युवराज
दुर्ग के रहने वाले युवराज सोनी की कहानी भी बेहद दर्दनाक है। महज 20 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। युवराज अपने पिता कन्हैया सोनी के इकलौते बेटे थे। परिवार में उनकी एक छोटी बहन भी है, जो नौवीं कक्षा में पढ़ती है। परिजनों के मुताबिक, युवराज रक्षाबंधन के लिए घर आए थे। बहन से राखी बंधवाने और परिवार के साथ कुछ समय बिताने के बाद वह दिल्ली लौटे थे। परिवार को उनसे भविष्य को लेकर कई उम्मीदें थीं, लेकिन सत्य निकेतन के हादसे ने उन सभी सपनों को एक झटके में खत्म कर दिया।
एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचे परिजन
युवराज की मौत की खबर मिलने के बाद उनके परिवार के लोग दिल्ली पहुंचे। उनका पार्थिव शरीर एम्स ट्रॉमा सेंटर में रखा गया। परिजनों की पहचान और अन्य औपचारिकताओं के बाद शव को दुर्ग ले जाने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन की ओर से परिवार को आवश्यक मदद उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इस मुश्किल घड़ी में संबंधित अधिकारी परिजनों के संपर्क में हैं।
बेसमेंट में चल रहा था मरम्मत का काम
हादसे की वजह को लेकर शुरुआती जांच में कई अहम बातें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि जिस इमारत में हादसा हुआ, वह करीब पांच दशक पुरानी थी। उसके बेसमेंट में निर्माण या मरम्मत से जुड़ा काम चल रहा था। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि काम के दौरान इमारत का एक पिलर कमजोर या अस्थिर हो गया। इसके अलावा बेसमेंट में पानी जमा होने की बात भी सामने आई है। माना जा रहा है कि इन परिस्थितियों के चलते इमारत की संरचना पर दबाव बढ़ा और आखिरकार पूरा भवन धराशायी हो गया। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह अभी जांच का विषय है।
सुरक्षा मानकों को लेकर भी उठ रहे सवाल
इमारत गिरने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों की जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि बेसमेंट में चल रहे काम के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं। इसके साथ ही भवन की उम्र, उसकी संरचनात्मक स्थिति और पहले से किसी तरह की शिकायत या चेतावनी मिलने जैसे पहलुओं को भी जांच के दायरे में रखा गया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे असल कारण क्या था और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।