दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। बीते दिनों हुए प्रदर्शन के बाद भी आंदोलन थमा नहीं है और बड़ी संख्या में छात्र फिर से धरना स्थल पर जुट रहे हैं। आंदोलन का असर अब दिल्ली से बाहर भी दिखाई देने लगा है। कई शहरों में छात्र और युवा शिक्षा व्यवस्था, रोजगार और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया है।
जंतर-मंतर पर लगातार बढ़ रही प्रदर्शनकारियों की संख्या
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र लगातार डटे हुए हैं। आंदोलन में शामिल युवाओं का कहना है कि वे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों और अपने भविष्य को लेकर आवाज उठा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान बारिश और अन्य परिस्थितियों के बावजूद आंदोलन जारी रखा गया। धरना स्थल पर लगातार नए लोगों के पहुंचने से प्रदर्शन का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है।
20 जुलाई की झड़प के बाद भी आंदोलन नहीं रुका
20 जुलाई को आयोजित "चलो पार्लियामेंट" मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी थी। संसद की ओर बढ़ रहे छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई, जिसमें कई लोग घायल हुए। इसके बाद भी प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे और दोबारा जंतर-मंतर पहुंचकर अपना विरोध जारी रखा।
भूख हड़ताल और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं। आंदोलनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए और छात्रों की चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए।
दिल्ली से निकलकर कई शहरों तक पहुंचा आंदोलन
छात्रों का यह विरोध अब केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, पटना सहित कई शहरों में भी छात्र समर्थन प्रदर्शन कर रहे हैं। बड़ी संख्या में युवा शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर अपनी बात रख रहे हैं। आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक यह अभियान जारी रहेगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी हुई तेज
छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। विपक्षी दलों ने आंदोलन का समर्थन करते हुए छात्रों की मांगों को उचित बताया है और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा है। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि आंदोलन को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। इस बीच पूरे घटनाक्रम पर देशभर की नजर बनी हुई है।