Delhi-Varanasi sleeper bus: कानपुर के रामादेवी चौराहे पर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब दिल्ली से वाराणसी जा रही एक लग्जरी डबल-डेकर स्लीपर बस में अचानक आग भड़क उठी। बस में करीब 30–40 यात्री मौजूद थे, जिनमें से कई सो रहे थे। ऊपरी डेक पर रखे भारी सामान से धुआँ उठता देख चालक और परिचालक ने बस को किनारे लगाने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया। आग इतना तेजी से फैली कि घबराए यात्री बस रुकने का इंतजार किए बिना खिड़कियों और दरवाजों से कूदकर अपनी जान बचाने लगे।
पुलिस की बहादुरी से बचीं कई जानें
घटना के समय रामादेवी चौराहे पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने जब जलती बस को देखा तो बिना देर किए दौड़ पड़े। कई यात्री ऊपरी बर्थ पर फंसे हुए थे, जिनकी चीखें बाहर तक सुनाई दे रही थीं। पुलिसकर्मी आग और धुएँ के बीच बस के अंदर घुसे और एक-एक कर करीब आधा दर्जन लोगों को बाहर निकाला। स्थानीय लोग भी मदद के लिए आगे आए और पानी की बोतलें फेंककर आग को धीमा करने की कोशिश करते रहे। यात्रियों का आरोप है कि बस में जरूरत से कई गुना ज्यादा सामान लादा गया था, जिसकी वजह से आग तेजी से फैल गई। कई यात्रियों का नकद, कपड़े, कीमती सामान और जरूरी दस्तावेज आग में खाक हो गए।
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आग का कारण और विभागों की लापरवाही
दमकल विभाग को सूचना मिलते ही छह गाड़ियाँ मौके पर भेजी गईं, लेकिन नेशनल हाइवे पर जाम होने के कारण उन्हें पहुँचने में काफी समय लगा। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग नियंत्रित हुई, तब तक बस का ढांचा ही बचा था। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को मुख्य कारण माना जा रहा है, साथ ही ओवरलोडिंग और खतरनाक सामान भी आग के तेज फैलाव की वजह बने। लगातार शिकायतों के बावजूद ट्रैवल बसों में ओवरलोडिंग, RTO की ढीली कार्रवाई और GST चोरी जैसे मामलों पर विभागों की लापरवाही अब बड़े सवाल खड़े कर रही है। जानकारों का कहना है कि कई ट्रैवल एजेंसियां भारी स्तर पर नियमों की धज्जियाँ उड़ा रही हैं, लेकिन अधिकारी कार्रवाई के बजाय घटनाओं का इंतजार करते प्रतीत होते हैं।