दिल्ली सरकार ने सर्दियों में बढ़ने वाले प्रदूषण और घने कोहरे से निपटने के लिए बड़ा प्लान तैयार किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने 19 जून 2026 को विंटर एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क को अधिसूचित किया है। यह नियम हर साल एक नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहने की बात कही गई है। सरकार का मकसद प्रदूषण बहुत बढ़ने के बाद कदम उठाने के बजाय पहले से तैयारी करना है। सर्दियों में दिल्ली की हवा खराब होने पर लोगों को सांस लेने और सफर करने में परेशानी होती है। इस बार सरकार पहले से कड़े कदम उठाने की तैयारी में है।
वर्क फ्रॉम होम का विकल्प
दिल्ली में सड़कों और मेट्रो की भीड़ कम करने के लिए वर्क फ्रॉम होम लागू किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर सरकारी और निजी दफ्तरों को ऐसा रोस्टर बनाने को कहा जा सकता है, जिसमें सिर्फ 50 फीसदी कर्मचारी ऑफिस आएं। बाकी कर्मचारी घर से काम कर सकते हैं। दफ्तरों के खुलने और बंद होने का समय भी अलग अलग किया जा सकता है। कुछ ऑफिस सुबह आठ बजे, कुछ नौ बजे और कुछ दस बजे खुल सकते हैं। इससे एक ही समय पर सड़कों पर वाहनों की भीड़ कम करने की कोशिश होगी। हालांकि यह फैसला प्रदूषण और हालात देखकर लागू किया जाएगा।
पीयूसी बिना नहीं मिलेगा ईंधन
दिल्ली में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्ती बढ़ सकती है। अगर किसी गाड़ी का पीयूसी सर्टिफिकेट खत्म हो गया है, तो पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं मिलने की व्यवस्था की जा सकती है। पंपों पर लगे कैमरे और डिजिटल रिकॉर्ड से गाड़ियों की जांच हो सकती है। नियम तोड़ने पर चालान भी कट सकता है। सरकार का मानना है कि पुराने और ज्यादा धुआं छोड़ने वाले वाहन प्रदूषण बढ़ाते हैं। इसलिए वाहन मालिकों को समय पर पीयूसी बनवाना जरूरी होगा। पेट्रोल या डीजल भरवाने से पहले लोगों को अपने वाहन के कागज जरूर जांच लेने चाहिए।
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पार्किंग और बाहरी गाड़ियों पर सख्ती
निजी गाड़ियों का इस्तेमाल कम कराने के लिए बाजारों और दफ्तरों के पास पार्किंग का चार्ज दोगुना किया जा सकता है। सरकार चाहती है कि लोग ज्यादा से ज्यादा मेट्रो, बस और साझा वाहन का इस्तेमाल करें। एक नवंबर से 31 जनवरी के बीच दिल्ली के बाहर रजिस्टर गैर बीएस-6 कमर्शियल वाहनों की एंट्री रोकी जा सकती है। ऐसे वाहनों को पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की तरफ भेजा जाएगा। हालांकि सीएनजी, इलेक्ट्रिक, आपातकालीन और सरकारी वाहनों को इस नियम से बाहर रखा जा सकता है। इससे दिल्ली में धुआं छोड़ने वाले वाहनों की संख्या कम करने का लक्ष्य है।
निर्माण और धूल पर नजर
सर्दियों में निर्माण और तोड़फोड़ से उड़ने वाली धूल भी दिल्ली की हवा खराब करती है। इसलिए दिसंबर और जनवरी के दौरान निर्माण कामों पर ज्यादा पाबंदी लगाई जा सकती है। निर्माण स्थलों पर पानी का छिड़काव करना और एंटी स्मॉग गन चलाना जरूरी हो सकता है। नियम न मानने वाली साइट को तुरंत सील करने की कार्रवाई भी हो सकती है। सरकार की टीम निर्माण स्थलों की जांच करेगी। बिल्डरों और ठेकेदारों को धूल रोकने के लिए पर्दे लगाने, मलबा ढकने और सड़क साफ रखने जैसे नियमों का पालन करना होगा। इससे हवा में धूल कम करने की कोशिश की जाएगी।
कूड़ा जलाने पर होगी कार्रवाई
खुले में कूड़ा, सूखे पत्ते या प्लास्टिक जलाने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की तैयारी है। ऐसा करने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। सर्दियों में धुआं हवा में लंबे समय तक बना रहता है और प्रदूषण को ज्यादा खतरनाक बना देता है। सरकार लोगों से कूड़ा न जलाने और नगर निगम की व्यवस्था का इस्तेमाल करने की अपील करेगी। इस पूरे प्लान का असर सर्दियों में ही साफ होगा। सरकार का दावा है कि पहले से तैयारी करने पर प्रदूषण की मार कुछ कम की जा सकती है। अब लोगों को भी नियमों का पालन करना होगा।