देश की राजधानी दिल्ली की हवा एक बार फिर जानलेवा स्तर पर पहुंच गई है। तमाम सरकारी उपायों और पाबंदियों के बावजूद प्रदूषण कम होने के संकेत नहीं दिख रहे। शुक्रवार को भी राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार दर्ज किया गया, जिससे हालात ‘गंभीर’ बने हुए हैं। घना स्मॉग, शून्य विजिबिलिटी और ठंड के मेल ने दिल्लीवासियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
स्मॉग की मोटी परत, सड़कों से आसमान तक धुंध
शुक्रवार सुबह दिल्ली के कई इलाकों में हालात ऐसे रहे कि सामने कुछ मीटर दूर तक देख पाना भी मुश्किल हो गया। स्मॉग और कोहरे की मोटी परत ने सड़कों, फ्लाईओवर और ऊंची इमारतों को अपनी गिरफ्त में ले लिया। कई जगह विजिबिलिटी लगभग शून्य रही, जिससे सुबह के समय ट्रैफिक की रफ्तार थम सी गई और सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया।
एयर क्वालिटी ‘गंभीर’, पूर्वी दिल्ली सबसे ज्यादा प्रभावित
एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग आंकड़ों के मुताबिक राजधानी के कई हिस्सों में AQI ‘गंभीर’ और ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया। पूर्वी दिल्ली के इलाकों में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक रही, जहां सांस लेना भी चुनौती बन गया। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक इस स्तर का प्रदूषण बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।
उड़ानें और ट्रेनें प्रभावित, यात्रियों की बढ़ी परेशानी
खराब विजिबिलिटी का सीधा असर हवाई और रेल यातायात पर पड़ा। कई फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं, जबकि कई घंटों की देरी से संचालित हुईं। ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित रहा, जिससे यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों पर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।
आगे और बिगड़ सकते हैं हालात
एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के अनुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में प्रदूषण से राहत की संभावना कम है। मौसम में नमी और कम हवा की रफ्तार के चलते स्मॉग बने रहने के आसार हैं। रविवार तक स्थिति फिर से ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंच सकती है, जिससे प्रशासन और नागरिकों दोनों की चिंता बढ़ गई है।
प्रशासन की सख्ती, लेकिन राहत नाकाफी
प्रदूषण से निपटने के लिए प्रशासन ने BS-VI मानक से कम वाहनों की एंट्री पर रोक, ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ जैसे नियम लागू किए हैं। पेट्रोल पंपों पर बिना वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र वाले वाहनों को ईंधन नहीं दिया जा रहा। इसके बावजूद फिलहाल हवा की गुणवत्ता में ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा।