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देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर गैस चेंबर में तब्दील हो चुकी है. आसमान में धुंए की मोटी चादर है और लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल हो गया है. हालात इतने खराब हैं कि कई इलाकों में AQI 400 के पार पहुंच चुका है. अलीपुर, आनंद विहार और बवाना में हवा गंभीर श्रेणी में है, वहीं गाजियाबाद और नोएडा में भी लोग जहरीली हवा के बीच जिंदगी काटने को मजबूर हैं. सरकार के तमाम उपायों के बावजूद दिल्ली की हवा सुधरने का नाम नहीं ले रही, लेकिन अब मदद का हाथ पड़ोसी देश चीन की ओर से आया है.
चीन आया दिल्ली के साथ
भारत की खराब होती हवा को देखते हुए चीन ने भारत को अपनी तकनीकी और नीतिगत मदद देने की पेशकश की है. चीन की दूतावास प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया पर लिखा हम भी कभी स्मॉग से जूझते थे, लेकिन अब हमारे आसमान नीले हैं. हम भारत को अपना अनुभव साझा करने के लिए तैयार हैं. चीन ने 2013 में Air Pollution Prevention and Control Action Plan लागू किया था, जिसने वहां की हवा पूरी तरह बदल दी. इस योजना के तहत चीन ने कोयले पर निर्भरता घटाई, पुराने वाहनों को हटाया और शहरों से भारी उद्योगों को बाहर शिफ्ट किया. बीजिंग से लेकर शंघाई तक अब हवा साफ है और लोग नीले आसमान का नजारा फिर से देख पा रहे हैं.
चीन का ‘क्लीन एयर मॉडल’, दिल्ली में !
चीन ने वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए जो कदम उठाए, वो दुनिया के लिए एक मिसाल बन गए. लाखों पुराने वाहनों को सड़कों से हटाया गया, इलेक्ट्रिक बसें और टैक्सियां शुरू की गईं, साइकिल लेन और मेट्रो नेटवर्क का विस्तार हुआ. प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को शहरों से बाहर किया गया और जो कंपनियां नियमों का पालन नहीं करती थीं, उन पर भारी जुर्माना या बंदी की कार्रवाई हुई. चीन ने सिर्फ प्रदूषण घटाने पर ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को पुनर्जीवित करने पर भी फोकस किया शहरों में लाखों पेड़ लगाए गए और ग्रीन बिल्डिंग कोड लागू हुआ. यही वजह है कि अब बीजिंग की हवा पहले से 50% तक साफ हो चुकी है.
क्या बदलेगी दिल्ली की किस्मत?
अगर भारत ने चीन के इस क्लीन एयर मॉडल को अपनाया, तो दिल्ली की किस्मत बदल सकती है. रेखा सरकार अब इस दिशा में चीन के सहयोग से नई रणनीति बना रही है. इसमें दिल्ली के औद्योगिक इलाकों में प्रदूषण नियंत्रण, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा, और शहरों में ग्रीन बेल्ट विस्तार जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं. अब देखने वाली बात होगी कि क्या दिल्ली की ये धुंधली सुबहें सच में साफ होंगी या फिर ये वादे भी हवा में घुल जाएंगीं