देश में लोकसभा सीटों के नए बंटवारे को लेकर एक बार फिर राजनीति तेज हो गई है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार आने वाले मानसून सत्र में परिसीमन से जुड़ा बिल फिर ला सकती है। इससे पहले शरद पवार की पार्टी की नेता और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले के बयान ने नई चर्चा शुरू कर दी है। उनके बयान से संकेत मिल रहे हैं कि कुछ शर्तों के साथ उनकी पार्टी इस बिल पर सरकार का साथ देने के बारे में सोच सकती है। हालांकि सुले ने साफ कहा है कि बिल देखने के बाद ही आखिरी फैसला लिया जाएगा।
दक्षिण भारत को लेकर सुप्रिया सुले ने जताई चिंता
सुप्रिया सुले ने कहा कि परिसीमन का बिल अभी उनके पास नहीं आया है। बिल सामने आने के बाद उसका पूरा अध्ययन किया जाएगा और फिर पार्टी अपना फैसला लेगी। उन्होंने सबसे बड़ी चिंता दक्षिण भारत के राज्यों को लेकर जताई। सुले का कहना है कि अगर सिर्फ आबादी के आधार पर लोकसभा सीटों का नया बंटवारा किया गया तो इसका नुकसान दक्षिण भारत के राज्यों को हो सकता है। उनके मुताबिक ऐसा हुआ तो उन राज्यों के साथ ठीक नहीं होगा।
सीटें 50 प्रतिशत बढ़ीं तो बन सकती है बात
सुप्रिया सुले ने एक ऐसे तरीके का भी जिक्र किया जिस पर विपक्ष के कुछ दल सरकार के साथ आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर हर राज्य की मौजूदा लोकसभा सीटों के हिसाब से सीटों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाती है तो इस पर ज्यादा आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने साफ किया कि इसका मतलब अभी बिल को समर्थन देना नहीं है। पहले बिल की पूरी जानकारी देखी जाएगी और इसके बाद ही पार्टी अपना रुख साफ करेगी।
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उद्धव की शिवसेना के रुख पर भी किया बड़ा दावा
सुप्रिया सुले ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई सभी दलों की बैठक में लोकसभा सीटों को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने के तरीके पर चर्चा हुई थी। उनके मुताबिक शरद पवार की पार्टी के साथ उद्धव ठाकरे की शिवसेना और कुछ दूसरे विपक्षी दलों ने भी इस बात पर अच्छा रुख दिखाया था। सुले ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के दूसरे नेताओं से भी बात करेगी। इसके बाद ही समर्थन या विरोध का फैसला होगा।
अमित शाह ने दक्षिण भारत को लेकर क्या कहा था?
इस साल अप्रैल में संसद के विशेष सत्र के दौरान केंद्र सरकार परिसीमन से जुड़े बिल लेकर आई थी। उस समय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि किसी भी राज्य के साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने खास तौर पर दक्षिण भारत के राज्यों का जिक्र किया था। अमित शाह के मुताबिक नए बदलाव के बाद दक्षिण भारत को नुकसान नहीं बल्कि फायदा होगा। उन्होंने दावा किया था कि अभी दक्षिण भारत से 129 सांसद हैं और बदलाव के बाद यह संख्या बढ़कर 195 हो सकती है।
क्या सरकार को मिलेगा विपक्ष का साथ?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि परिसीमन बिल पर विपक्ष का रुख बदलेगा या नहीं। इंडिया गठबंधन के दल पहले इस बिल का विरोध कर चुके हैं। विपक्ष का आरोप रहा है कि सीटों के नए बंटवारे में राज्यों के साथ गलत हो सकता है। लेकिन सुप्रिया सुले के ताजा बयान से साफ है कि विपक्ष के कुछ दल बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं कर रहे हैं। अगर सरकार सभी राज्यों की मौजूदा सीटों के हिसाब से बराबर बढ़ोतरी का रास्ता अपनाती है तो बिल पर नई सहमति बन सकती है। फिलहाल सबकी नजर बिल के आखिरी रूप पर टिकी है।