संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। सत्ता पक्ष जहां इसे महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति करार दे रहा है। खासतौर पर परिसीमन को लेकर उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व संतुलन का मुद्दा गरमा गया है, जिससे सियासी माहौल और भी तीखा हो गया है।
परिसीमन बिल पर बढ़ा विवाद
संसद में परिसीमन बिल को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण करती है, जिससे कुछ राज्यों को फायदा और कुछ को नुकसान हो सकता है। इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
महिला आरक्षण से जुड़ा नया समीकरण
सरकार का तर्क है कि महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन जरूरी है। वहीं विपक्ष का कहना है कि दोनों मुद्दों को अलग-अलग रखा जाना चाहिए। उनका आरोप है कि महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन को “बैकडोर” से लागू किया जा रहा है।
उत्तर बनाम दक्षिण की बहस
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि जो राज्य जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहे, उन्हें नुकसान होगा, जबकि जिन राज्यों में जनसंख्या अधिक बढ़ी है, उन्हें ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलेगा। इससे उत्तर और दक्षिण राज्यों के बीच असंतुलन की आशंका जताई जा रही है।
सरकार का पक्ष और आश्वासन
सरकार ने साफ किया कि किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा। उनका दावा है कि परिसीमन के बाद सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व संतुलित रहेगा और दक्षिण भारत की सीटों में भी वृद्धि होगी। इसे लेकर भ्रम फैलाने का आरोप भी लगाया गया।
आगे क्या होगा?
संसद में इस मुद्दे पर चर्चा अभी जारी है और आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होने की संभावना है। विपक्ष संशोधन की मांग कर रहा है, जबकि सरकार इसे पारित कराने के लिए तैयार दिख रही है। यह देखना अहम होगा कि क्या सहमति बनती है या यह मुद्दा और गहराता है।