UP News: उत्तर प्रदेश पुलिस सिपाही भर्ती में आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट देने की मांग तेज हो गई है। हाल ही में जारी हुई 32,679 पदों की भर्ती अधिसूचना के बाद युवाओं में निराशा व्याप्त है, क्योंकि पुरुष अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 22 वर्ष और महिलाओं के लिए 25 वर्ष रखी गई है। इस बीच राज्यमंत्री डॉ. अरुण कुमार निषाद, भाजपा विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी और विधायक दिनेश रावत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संयुक्त पत्र लिखकर सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को आयु सीमा में तीन साल की विशेष छूट प्रदान करने की जोरदार मांग की है। पत्र में इन नेताओं ने तर्क दिया है कि पिछली पुलिस भर्ती कई वर्षों बाद आई है, जिसके कारण कोविड काल और अन्य देरी से हजारों युवा ओवरएज हो चुके हैं।
सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी विशेष रूप से प्रभावित
सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी विशेष रूप से प्रभावित हैं, क्योंकि अन्य राज्यों में पुलिस भर्ती की आयु सीमा 25 वर्ष तक है, जबकि यूपी में इसे 22 वर्ष रखा गया है। आरक्षित वर्गों को पहले से ही पांच वर्ष की छूट मिलती है, लेकिन सामान्य वर्ग के युवाओं को कोई अतिरिक्त राहत नहीं दी गई है। नेताओं ने कहा कि इससे लाखों मेहनती युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा और वे भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे।
आवेदन प्रक्रिया 30 जनवरी 2026 तक
यह मांग कोई नई नहीं है। इससे पहले 2023-24 की 60,244 पदों वाली भर्ती में भी इसी तरह की मांग उठी थी, जिस पर मुख्यमंत्री योगी ने सभी वर्गों को तीन वर्ष की छूट देकर युवाओं को बड़ी राहत प्रदान की थी। उस समय भी कई विधायकों और मंत्रियों ने पत्र लिखकर हस्तक्षेप किया था। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने 31 दिसंबर 2025 को यह भर्ती अधिसूचना जारी की थी, जिसमें सिविल पुलिस, पीएसी, एसएसएफ आदि में पद शामिल हैं। आवेदन प्रक्रिया 30 जनवरी 2026 तक चलेगी।
आयु छूट उनका हक
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस मांग पर विचार करती है तो लाखों अतिरिक्त अभ्यर्थी भर्ती में शामिल हो सकेंगे, जिससे प्रतियोगिता और बढ़ जाएगी। युवाओं का कहना है कि भर्ती में देरी के लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं, इसलिए आयु छूट उनका हक है। अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर टिकी हैं, कि क्या वे फिर से युवाओं के हित में बड़ा फैसला लेते हैं या नहीं। इस मुद्दे पर बोर्ड और सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।