लखनऊ। एक अनोखी एकजुटता की मिसाल पेश करते हुए प्रसिद्ध देवबंदी उलेमा और जमीयत दावातुल मुस्लिमीन के संरक्षक मौलाना कारी इश्हाक गोरा ने ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गाय को 'राष्ट्रमाता' घोषित करने की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य की यह मांग पूरी तरह जायज है और मुस्लिम समुदाय भी गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की इच्छा रखता है।
कारी इश्हाक गोरा ने अपने बयान में कहा, शंकराचार्य जी की मांग सही है। हम भी चाहते हैं कि गाय को राष्ट्रमाता घोषित किया जाए। गाय हमारी संस्कृति और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पशु नहीं, बल्कि मां के समान है, जो दूध, गोबर और गोमूत्र से समाज को पोषण देती है। इस्लाम में भी जानवरों के प्रति दया और संरक्षण की शिक्षा दी गई है।
गाय की रक्षा और सम्मान सभी के लिए आवश्यक है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाकुंभ 2025 के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने केंद्र सरकार को 33 दिनों का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने मांग की थी कि गाय को पशु श्रेणी से हटाकर राष्ट्रमाता घोषित किया जाए और गोहत्या को पूर्णतः अपराध माना जाए।
शंकराचार्य ने कहा था कि गाय के शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास है और इसे राष्ट्रमाता का दर्जा देकर गोहत्या पर सख्त प्रतिबंध लगाना चाहिए। उन्होंने गो ध्वज यात्रा और आंदोलन के माध्यम से इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया है।
कारी इश्हाक गोरा का यह समर्थन हिंदू-मुस्लिम एकता का मजबूत संदेश देता है। देवबंदी विचारधारा में जानवरों के प्रति करुणा और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया जाता है। मौलाना ने आगे कहा कि गाय की रक्षा से देश की कृषि, पर्यावरण और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। यह बयान सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा दे रहा है और गोसंरक्षण के मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान से धार्मिक नेताओं के बीच संवाद बढ़ेगा और गाय संरक्षण को राष्ट्रीय मुद्दा बनाने में मदद मिलेगी। कारी इश्हाक गोरा का यह बयान न केवल शंकराचार्य की मांग को बल देता है, बल्कि अंतरधार्मिक समझ को भी मजबूत करता है। अब देखना यह है कि सरकार इस संयुक्त आवाज पर क्या निर्णय लेती है।