दिल्ली हरिद्वार नेशनल हाईवे पर बने छपार टोल प्लाजा के डिप्टी टोल मैनेजर की अपहरण कर हत्या करने वाले दो मुख्य आरोपियों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में निरुद्ध किया गया है। एसएसपी की संस्तुति पर डीएम ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) कार्रवाई के आदेश दिए है। दोनों आरोपियों को एनएसए में निरुद्व कर जेल में आदेश तामिल करा दिया गया है। जनपद में सात साल बाद किसी लोक व्यवस्था प्रभावित करने वाले किसी अपराधी पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत कार्रवाई की गयी है।
शिव निवासीगण भौराकलां को शराब पीने से रोका
मुजफ्फरनगर में रुड़की रोड पर स्थित छपार टोल प्लाजा। के डिप्टी टोल मैनेजर अरविंद पांडेय निवासी जनपद चंदौली ने 18 सितंबर 2024 की रात टोल पर काम करने वाले आरोपी शुभम उर्फ मनी व शिवम उर्फ शिव निवासीगण भौराकलां को शराब पीने से रोका था। उसके कुछ समय पश्चात आरोपियों ने अपने साथियों के साथ डिप्टी टोल मैनेजर का मारपीट करते हुए गाड़ी में डालकर अपहरण कर लिया था।
मामले में जातीय तनाव भी फैल गया
आरोपियों ने डिप्टी टोल मैनेजर का अपहरण करने के पश्चात हत्या कर शव मेरठ जनपद के जानी नहर में फेंक दिया था। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेह पर डिप्टी टोल मैनेजर का शव बरामद किया था। इस मामले में पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद छपार टोल प्लाजा पर जबरदस्त धरना प्रदर्शन कई दिन चला था और इस मामले में जातीय तनाव भी फैल गया था। छपार थाना प्रभारी मोहित चौधरी ने मुख्य आरोपी शिवम उर्फ शिव व शुभम उर्फ मनी पर एनएसए लगाने के लिए रिपोर्ट एसएसपी संजय कुमार वर्मा को प्रेषित की थी, क्योंकि जेल में बंद दोनों आरोपियों ने जमानत के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था।
दो आरोपियों पर एनएसए की कार्रवाई की
इस मामले में एसएसपी की संस्तुति पर डीएम उमेश मिश्रा ने दोनों आरोपियों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में निरुद्ध करने के आदेश दे दिए है। दोनों आरोपियों को जेल पर पहुंचकर पुलिस ने आदेश तामील करा दिए हैं। एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि डिप्टी टोल मैनेजर की हत्या करने वाले दो आरोपियों पर एनएसए की कार्रवाई की गयी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत कार्रवाई की गई
मुजफ्फरनगर में 2013 में सांप्रदायिक दंगे के दौरान तत्कालीन विधायक सुदेश राणा, संगीत सोम, तत्कालीन भाजपा नेता और 2017 में विधायक बने बिक्रम सैनी आदि पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत कार्रवाई की गई थी। इसके बाद 2019 में भी अप्रैल में एससी एसटी एक्ट में बदलाव की अफवाह को लेकर हुए आंदोलन में हिंसक प्रदर्शन के बाद रासुका में कार्रवाई की गई थी। इसके सात साल बाद अब फिर रासुका में कार्रवाई की गई है।