प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए ई-पॉश मशीनों से राशन वितरण और ऑनलाइन निगरानी की व्यवस्था लागू है, लेकिन खाद्यान्न की वास्तविक उपलब्धता और उसकी सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। कहीं ई-पॉश पर अंगूठा लगवाने के बाद राशन नहीं मिलने की शिकायत है तो कहीं सरकारी स्टॉक का भौतिक सत्यापन करने पर खाद्यान्न कम मिल रहा है। अमेठी और बागपत के हालिया मामले निगरानी व्यवस्था की खामियों को उजागर कर रहे हैं।
आठ क्विंटल गेहूं और 13 क्विंटल चावल मिल
अमेठी के जामों विकासखंड की राजामऊ ग्राम पंचायत में निलंबित कोटेदार पचईराम की दुकान के सत्यापन में 57.24 क्विंटल खाद्यान्न कम मिला। अभिलेखों में 31.29 क्विंटल गेहूं और 46.95 क्विंटल चावल दर्ज था, जबकि मौके पर केवल आठ क्विंटल गेहूं और 13 क्विंटल चावल मिला। इस तरह 23.29 क्विंटल गेहूं और 33.95 क्विंटल चावल की कमी पाई गई। इसके अलावा 45 किलो चीनी भी गायब मिली। ग्रामीणों ने सितंबर का राशन देने के नाम पर ई-पॉश मशीन पर अंगूठा लगवाने के बावजूद खाद्यान्न नहीं देने की शिकायत की थी। 27 अक्टूबर को भौतिक सत्यापन के बाद जिलाधिकारी की अनुमति से 31 अक्टूबर को आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 में मुकदमा दर्ज कराया गया।
ट्रक छोड़ने के बदले दो लाख रुपये मांगने का आरोप
बागपत में सरकारी खाद्यान्न की ढुलाई और निगरानी में लापरवाही का दूसरा मामला सामने आया है। यहां परिवहन ठेकेदार के प्रतिनिधि ने आपूर्ति निरीक्षक संजीव कुमार सिंह पर राशन से भरा ट्रक छोड़ने के बदले दो लाख रुपये मांगने का आरोप लगाया। बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी अधिकारियों को सौंपी गई। जांच में ट्रक में लदा राशन सही पाए जाने के बावजूद उसे सिंघावली अहीर थाने में खड़ा रखा गया। खुले में खड़े ट्रक में बारिश से करीब 90 से 95 क्विंटल चावल खराब हो गया। जिलाधिकारी की संस्तुति पर शासन ने आपूर्ति निरीक्षक को निलंबित कर दिया है।
जिला पूर्ति अधिकारी विकास कुमार के मुताबिक, ठेकेदार प्रतिनिधि से रुपये मांगने के मामले में जांच रिपोर्ट और ऑडियो रिकॉर्डिंग शासन को भेजी गई थी। इसी आधार पर निलंबन की कार्रवाई हुई है। खराब खाद्यान्न की जिम्मेदारी तय करने और वसूली का मामला भी जांच के दायरे में है।
78 हजार से अधिक दुकानों से होता है वितरण
प्रदेश में खाद्यान्न वितरण का दायरा काफी बड़ा है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के स्मार्ट पीडीएस पोर्टल के तीन नवंबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में 3.67 करोड़ से अधिक राशन कार्ड दर्ज थे। इनमें 3.37 करोड़ से अधिक कार्डों पर राशन उठाया गया। प्रदेश की 78,174 उचित दर दुकानों में 1,229 दुकानें सक्रिय नहीं थीं। महीने का वितरण प्रतिशत 91.94 दर्ज किया गया। यानी इतनी बड़ी व्यवस्था में ऑनलाइन लेनदेन दर्ज होने के बावजूद खाद्यान्न की भौतिक उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्र लाभार्थियों को राशन नहीं मिलने, कम खाद्यान्न देने और कालाबाजारी जैसी शिकायतों के निस्तारण के लिए जिला शिकायत निवारण अधिकारी और राज्य खाद्य आयोग तक व्यवस्था है। सवाल यह है कि ई-पॉश पर दर्ज वितरण और वास्तविक खाद्यान्न की उपलब्धता का नियमित मिलान कितनी प्रभावी ढंग से हो रहा है।