युवराज हां युवराज, ये कहानी है ग्वालियर के युवराज की। युवराज नाम नहीं है, ये है वाकई में युवराज हैं, ये ग्वालियर के महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया के सुपुत्र युवराज महाआर्यमन ज्योतिरादित्य सिंधिया। करोड़ों-अरबों की दौलत होने के बावजूद युवराज महाआर्यमन सिंधिया सब्जी-भाजी बेचने की अपनी कंपनी चला रहे हैं। युवराज महाआर्यमन के खानदान के पास इतनी अथाह संपति है, कि उन्हें काम करने जरूरत नहीं है। इतना सब होने के बावजूद भी युवराज ने अपने दम पर अपना काम शुरू किया। हालांकि जिस सिंधिया परिवार से वो आते हैं, उन्हें धंधे की कुछ खास फिकर नहीं होनी थी, लेकिन सिंधिया परिवार के युवराज अलग सोच रखते हैं।
ग्वालियर के राजघराने की विरासत जिनके कंधों पर है, उनके मात्र रहने के लिए 40000 करोड़ रुपये का जय विलास पैलेस हैं, तिजोरी में अरबों की दौलत है...इन तमाम बातों से ये आंकलन करना मुश्किल नहीं है कि इस युवराज के ठाठ-बाट कैसा होगा, लेकिन ग्वालियर के राजघराने के युवराज को देखें तो बहुत ही आम इंसान की तरह उनका व्यवहार है, सिंधिया परिवार के युवराज होने के बावजूद उनमें एक आम व्यक्ति के जैसी सरलता है। युवराज अपने दम पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। करोड़ों-अरबों की दौलत के बावजूद युवराज महाआर्यमन सिंधिया सब्जी-भाजी बेचने की कंपनी चला रहे हैं।
सिंधिया परिवार के युवराज अलग सोच रखते हैं। उन्होंने पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया की राजनीति, राज परिवार की विरासत से अलग हटकर फल-सब्जी बेचने का काम शुरू किया। लोगों की परवाह किए बिना युवराज महल से सब्जी बेच रहे हैं,लगता है जैसे, आर्यमन ने तो ठान लिया कि कुछ अपने दम पर ही करना है।
आर्यमन सिंधिया का कहना है कि जब वो दून स्कूल में अपनी पढ़ाई कर रहे थे तभी उन्होंने पढ़ाई के दौरान ही ठान लिया था, कि वो अपने दम पर अपना खुद का नाम बनाएंगे। अपने दोस्त के साथ मिलकर 2021 में उन्होंने MyMandi नाम से स्टार्टअप शुरू किया। महाआर्यमन MyMandi के को-फाउंडर हैं, वो अपने इस बिजनेस आइडिया को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। शुरुआत में वो खुद सुबह-सुबह मंडी जाकर ताजी फल-सब्जियां खरीदकर उसे अपने ऐप के जरिए लोगों तक पहुंचाते थे।
महाआर्यमन ने दून स्कूल शुरुआती पढ़ाई की उसके बाद उन्होंने गेल यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप और सॉफ्टबैंक जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, अब खुद का कारोबार खड़ा कर रहे हैं।
महाआर्यमन का MyMandi एप ऑनलाइन एग्रीगेटर है, जो फल और सब्जियों की सप्लाई करता है। ये स्टार्टअप थोक में सब्जी-भाजी खरीदकर लोगों तक पहुंचाता है। कंपनी ताजी सब्जियों और फलों के लिए पुश कार्टर कम्युनिटी को उपलब्ध कराती है। उन्होंने अपने इस स्टार्टअप के साथ किसानो को भी जोड़ा हैं। आर्यमन ने अपने दोस्त सूर्यांश राणा के साथ मिलकर कृषि स्टार्टअप कंपनी MyMandi की शुरुआत की। अब तक पांच शहरों में मौजूद ये मंडी धीरे-धीरे अपना दायरा बढ़ा रही है।
वो खुद सामान खरीदने मंडी पहुंच जाते हैं। युवराज अपनी पहचान छिपाने के लिए अपना चेहरा कवर कर लेते हैं। MyMandi ने अब तक 3 फंडिंग राउंड किए हैं। सितंबर 2023 में कंपनी ने 1.2 मिलियन डॉलर के वैल्यूएशन पर फंड रेज किया था। महाआर्यमन का कहना है कि वो आठ करोड़ रुपये निवेश जुटाने की योजना पर काम कर रहे हैं, इसके लिए कंपनी का वैल्यूएशन करीब 150 करोड़ रुपये आंका गया है। इनकी इस कंपनी में रतन टाटा ने भी इनके स्टार्टअप में निवेश किया।
ये अपने पिता के लिए 13 साल की उम्र से ही चुनाव प्रचार और जनसभाओं में हिस्सा लेते रहे हैं। लोगों से मिलना-जुलना, उनके लिए काम करना उन्हें पसंद है। महाआर्यमन सिंधिया सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय है। उनके साथ सेल्फी लेने के लिए लोगों की लाइन लग जाती है। आप आर्यमन के सोशल मीडिया पर कभी समोसे तलते हुए, तो कभी लोगो के बीच चाट बनाते हुए वीडियो देख सकते हैं।
युवराज को लोग खूब पसंद करते हैं। राजसी परिवार के ताल्लुक रखने के बाद भी उन्होंने अपने दम पर काम शुरू किया। उन्होंने खुद की काबिलियत साबित करने की कोशिश की।
वो अक्सर लोगों के बीच पहुंचकर अपने काम के बारे में पूछते हैं। कभी ग्राहकों से तो कभी थोक विक्रेताओं से फीडबैक भी लेते हैं।