UPSC Success Story: देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UPSC सिविल सेवा परीक्षा क्रैक करने वाले UP के एक छोटे से गांव के रहने वाले मोइन अहमद एक बस ड्राइवर के बेटे हैं। कड़ी मेहनत कर तीन बार असफल होने के बाद भी मोइन ने हार नहीं मानी और चौथे प्रयास में IAS ऑफिसर बन ही गए।
कौन हैं IAS मोइन अहमद
मोइन अहमद मंसूरी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के एक छोटे से गांव जटपुरा के रहने वाले हैं। उनके पिता वली हसन UP रोड़वेज़ में बस चालक हैं। मोइन के पांच भाई-बहन हैं और दूसरे नंबर पर होने के कारण बहुत कम उम्र में ही मोइन ने जिम्मेदारी आ गई।
मोइन का IAS मोइन अहमद बनने का सफर
मोइन के बचपन से ही बड़े सपने रहे हैं। वे क्रिकेटर बनना चाहते थे, वे खेलते भी अच्छा थे पर आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी ने उन्हें अपने सपने से दूर कर दिया। किसी बड़े प्राइवेट स्कूल से नहीं बल्कि गांव के ही एक छोटे से सरकारी स्कूल से 12वीं कर उन्होंने बीएससी में एडमिशन लिया। जिसके बाद उन्होंने ठान लिया कि उन्हें IAS बनना है।
कॉलेज की पढ़ाई के साथ की UPSC की तैयारी
जिम्मेदारियों और आर्थिक हालातों के चलते मोइन के मन में कुछ बड़ा कर जाने का जज़बा आया जिसने उन्हें पढ़ाई से लगाव और अधिक कराया। उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई के साथ ही UPSC की तैयारी शुरु कर दी।
साइबर कैफे में नौकरी और UPSC की प्रेरणा
कॉलेज के दिनों में ही पैसों की कमी की वजह से मोइन ने साइबर कैफे में काम करना शुरु किया। यहीं से उन्हें UPSC सिविल सेवा परीक्षा के बारे में पता चला। उन्होंने ठान लिया कि अब उन्हें सिविल सर्वेंट ही बनना है। अब उनका ध्यान पढ़ाई और सरकारी नौकरी की तरफ और बढ़ गया।
साइबर कैफे की नौकरी से जोड़ी कोचिंग फीस
करीब दो साल 2016 से 2018 तक मोइन ने साइबर कैफे में काम किया। साथ ही उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। कुछ फीस जोड़ने के बाद मोइन ने ठाना कि अब वे दिल्ली के किसी कोचिंग से यूपीएससी की तैयारी करेंगे। इसके लिए उन्हें कैफे की नौकरी छोड़नी पड़ी। मोइन के पिता उनके इस फैसले से नाखुश थे क्योंकि उन्हें चिंता थी कि मोइन एक ऐसे भविष्य के लिए एक अच्छी नौकरी छोड़ रहे हैं जिसका परिणाम पहले से तय नहीं किया जा सकता। मोइन की दृढ़ इच्छाशक्ति, लगन, और कुछ कर दिखाने का जज़बा देखकर परिवार ने उनके इस फैसले को सपोर्ट किया। हालांकि कुछ रिश्तेदारों ने यह भी कहा कि मोइन सिर्फ अपने भविष्य को खतरे में डाल रहे हैं।
करीब 2.5 लाख का उधार, कड़ी मेहनत पर हाथ लगी असफलता
2019 में दिल्ली जाने के बाद मोइन पूरी तरह से UPSC की तैयारी में लग गए। कोचिंग के लिए जो फीस उन्होंने कैफे की नौकरी से जमा की थी वो काफी नहीं थी जिसके लिए उन्हें 2.5 लाख का उधार लेना पड़ा। दिन-रात की कड़ी मेहनत के बाद भी जिंदगी उन्हें असफलता के मोड़ पर ही लाकर खड़ी कर रही थी। लगातार तीन बार असफल होने के बाद भी मोइन घबराए नहीं और हर बार और कड़ी मेहनत करने में जुटे रहे। अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने और अधिक परिश्रम किया। थोड़ा वक्त ज़्यादा लगा पर अपनी लगन, कठिन परिश्रम और हार ना मानने के ज़जबे ने उन्हें उनके चौथे प्रयास में IAS अफसर बनने के लक्ष्य तक पहुंचा ही दिया। मोइन ने जो ठाना था वो कर के ही दिखाया।
UPSC CSE 2022 में 296वीं रैक लाकर बन गए IAS
मोइन ने बताया कि उनकी हर असफलता ने उन्हें और मज़बूत बनाया और कठिन परिश्रम करने में सहायता की। हर असफल प्रयास ने उनकी कमज़ोरियों को उनके सामने लाया जिसको सुधार कर उन्होंने अपने चौथे प्रयास में सफलता हासिल की। 2022 में 296वीं रैक हासिल कर उन्हें पश्चिम बंगाल कैडर मिला। उनकी इस सफलता के पीछे उन्होंने अपने परिवार का अहम सपोर्ट बताया है जिन्होंने उनके असफलता के दौर में मोटिवेट किया।