Increasing Number of Passengers: देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को लेकर संसद में पेश हुई संसदीय समिति की रिपोर्ट ने कई चिंताजनक पहलुओं को उजागर किया है। संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष संजय कुमार झा द्वारा पेश रिपोर्ट में बताया गया कि हवाई यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुरक्षा मानकों में उसी अनुपात में सुधार नहीं हुआ है, जिससे जोखिम बढ़ता जा रहा है।
सुरक्षा में बड़ी खामियां उजागर
रिपोर्ट के अनुसार महानिदेशालय नागरिक उड्डयन के ऑडिट में 754 विमानों में से 377 में बार-बार तकनीकी खामियां पाई गईं। साथ ही, हाल के विमान हादसों और करीब 100 सुरक्षा चूकों का जिक्र करते हुए समिति ने विमानन सुरक्षा की समीक्षा के लिए एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति बनाने की सिफारिश की है, जो छह महीने में अपनी रिपोर्ट दे।
स्टाफ की भारी कमी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सुरक्षा की निगरानी करने वाली संस्था खुद संसाधनों के संकट से जूझ रही है। महानिदेशालय नागरिक उड्डयन में 1,630 स्वीकृत पदों में से केवल 843 ही भरे हैं। लगभग आधे पद खाली होने से निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है। समिति ने सरकार से जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
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उड़ान योजना पर सवाल
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए शुरू की गई उड़ान योजना पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद कई रूट अब तक शुरू नहीं हो पाए हैं। समिति ने योजना का स्वतंत्र मूल्यांकन कराने और उसकी प्रभावशीलता जांचने की जरूरत बताई है।
यात्रियों के अधिकार और पारदर्शिता
रिपोर्ट में यात्रियों के अधिकारों को लेकर स्पष्ट कानून की कमी को भी बड़ी समस्या बताया गया है। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के निवेश में पारदर्शिता बढ़ाने और संसद की निगरानी मजबूत करने की सिफारिश की गई है। समिति का मानना है कि तेजी से बढ़ते इस क्षेत्र में सुरक्षा, जवाबदेही और पारदर्शिता को प्राथमिकता देना अब बेहद जरूरी हो गया है।